- गिरिडीह पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 6 मोबाइल, 7 सिम कार्ड, आईपैड और दो बाइक बरामद, कई लोगों से ऑनलाइन ठगी करने का आरोप
Jharkhand: झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। डॉक्टर बनकर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग और आरटीओ अधिकारी बनकर फर्जी चालान भेजने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले दो शातिर साइबर अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद कैफ अंसारी और इरशाद अंसारी के रूप में हुई है। दोनों लंबे समय से अलग-अलग तरीकों से लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे थे।
Jharkhand News: कौन हैं गिरफ्तार साइबर ठग?
गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को डीएसपी रूपेंद्र राणा और साइबर थाना इंस्पेक्टर रामेश्वर भगत ने प्रेस वार्ता में बताया कि दोनों आरोपी बेहद शातिर अपराधी हैं और संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस ने इनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वाहन भी बरामद किए हैं।
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—
- 6 मोबाइल फोन
- 7 सिम कार्ड
- 1 आईपैड
- 2 मोटरसाइकिल
बरामद किए हैं। इन सभी उपकरणों का उपयोग साइबर ठगी में किया जा रहा था।
Jharkhand News: डॉक्टर बनकर कैसे करते थे ठगी?
पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को डॉक्टर या अस्पताल से जुड़ा कर्मचारी बताकर लोगों से संपर्क करते थे। वे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग के नाम पर लिंक भेजते या बैंकिंग जानकारी हासिल कर खाते से पैसे निकाल लेते थे। कई मामलों में लोगों को फर्जी मेडिकल सेवाओं के नाम पर भी निशाना बनाया गया।
आरटीओ अधिकारी बनकर भेजते थे फर्जी चालान
आरोपी खुद को आरटीओ अधिकारी बताकर लोगों के मोबाइल पर फर्जी ट्रैफिक चालान या जुर्माने का संदेश भेजते थे। इसके बाद भुगतान के नाम पर लोगों से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे। कई लोग इस धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।
Jharkhand News: पुलिस की लोगों से अपील
गिरिडीह पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि—
- किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- डॉक्टर, बैंक या आरटीओ के नाम पर आने वाले कॉल और मैसेज की पहले पुष्टि करें।
- किसी भी व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर अपराध से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार—
- केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही भुगतान करें।
- फर्जी चालान या बैंक मैसेज की पुष्टि संबंधित विभाग से करें।
- संदिग्ध कॉल या लिंक से बचें।
- मोबाइल और बैंकिंग ऐप में सुरक्षा सुविधाओं का उपयोग करें।



