शॉर्ट सर्किट से शेड की वायरिंग में लगी आग, धुएं से घिरा प्लेटफॉर्म; रेलवे और दमकल विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
Tatanagar Fire: जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर अचानक आग लगने से यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। आग प्लेटफॉर्म के शेड में लगी बिजली की वायरिंग में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। देखते ही देखते आग की लपटें तेज हो गईं। पूरे प्लेटफॉर्म पर धुआं फैलने लगा। इससे वहां मौजूद यात्रियों में दहशत फैल गई। स्थिति को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने एहतियातन प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर यात्रियों की आवाजाही रोक दी। सूचना मिलने के बाद रेलवे के अधिकारी और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
Tatanagar Fire: प्लेटफॉर्म बंद कर यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया
आग लगने के बाद प्लेटफॉर्म पर धुआं तेजी से फैलने लगा। इससे यात्रियों को सांस लेने और सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलने में परेशानी होने की आशंका पैदा हो गई। कई यात्री घबराकर प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने लगे। रेलवे प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सुरक्षा उपाय किए। प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर यात्रियों की आवाजाही रोक दी गई। इसके बाद प्लेटफॉर्म को कुछ घंटों के लिए बंद रखा गया।
रेलवे प्रशासन का यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया। आग और धुएं के बीच यात्रियों की मौजूदगी से स्थिति और गंभीर हो सकती थी। इसलिए पहले प्लेटफॉर्म को खाली कराने और आग पर नियंत्रण पाने को प्राथमिकता दी गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इस दौरान कितनी ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा। किसी ट्रेन को रद्द करने या उसका मार्ग बदलने की भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
Tatanagar Fire: शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई आग, शेड की वायरिंग बनी वजह
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म नंबर-1 के शेड में लगी बिजली की वायरिंग में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ। इसके बाद तारों में आग लग गई। शुरुआत में आग सीमित क्षेत्र में थी। लेकिन कुछ ही देर में लपटें तेज हो गईं। देखते ही देखते आग ने आसपास के हिस्से को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।
रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर बिजली की वायरिंग में खराबी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। प्लेटफॉर्म के शेड में बिजली के तारों का जाल रहता है। यहां यात्रियों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है। ऐसे में किसी भी तरह की विद्युत गड़बड़ी आग का कारण बन सकती है। हालांकि, इस घटना में शॉर्ट सर्किट की वास्तविक वजह का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।
दमकल विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे अधिकारियों ने संबंधित विभागों को सूचना दी। इसके बाद अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने आग बुझाने का काम शुरू किया। आग की लपटों और धुएं के बीच राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। काफी प्रयास के बाद आग पर नियंत्रण पाया जा सका।
आग बुझने के बाद रेलवे अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। शेड की वायरिंग और प्रभावित हिस्से की स्थिति का जायजा लिया गया। इसके साथ ही आग लगने के संभावित कारणों की जांच भी शुरू की गई। फिलहाल नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाना बाकी है। बिजली की वायरिंग को कितना नुकसान पहुंचा है और शेड का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है, इसकी जानकारी तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
रेलवे की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर आग लगने की यह घटना स्टेशन की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे पहले भी स्टेशन परिसर में बिजली से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर खबरें सामने आ चुकी हैं। हिन्दुस्तान की 25 जनवरी 2020 की एक रिपोर्ट में टाटानगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खंभों और कार्यालयों के स्विच बोर्ड में वर्ष 2018-19 के दौरान शॉर्ट सर्किट से चिंगारी निकलने की घटनाओं का उल्लेख किया गया था। उस समय रेलवे के वाणिज्य और इलेक्ट्रिकल विभाग की संयुक्त जांच तथा स्टॉलों पर अग्निशामक यंत्र रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया था।
वहीं, 9 अप्रैल 2026 को शार्प भारत में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, टाटानगर स्टेशन परिसर में अग्निशमन विभाग और रेलवे सिविल डिफेंस की ओर से फायर सेफ्टी मॉकड्रिल आयोजित की गई थी। इसमें रेलवे कर्मचारियों और आरपीएफ के जवानों को आग से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई थी। एरिया रेल मैनेजर विनोद कुमार ने भी इस दौरान सुरक्षा उपकरणों की समय-समय पर समीक्षा किए जाने की बात कही थी।
बिजली व्यवस्था की नियमित जांच जरूरी
भारतीय रेलवे की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रेल मंत्रालय ने भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। 5 अगस्त 2026 को जारी रेल मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, स्टेशनों पर शॉर्ट सर्किट की आशंका कम करने के लिए विद्युत प्रणालियों का नियमित रखरखाव और इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन का सुरक्षा ऑडिट किया जाता है। स्टेशनों पर अग्निशामक यंत्र, रेत और पानी से भरी बाल्टियां भी उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। कर्मचारियों को अग्निशमन और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की गई है।
टाटानगर स्टेशन की ताजा घटना के बाद भी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि शेड की वायरिंग में खराबी कैसे आई। क्या वायरिंग पुरानी थी या किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ? इसका जवाब जांच रिपोर्ट से ही मिल सकेगा। रेलवे प्रशासन के लिए जरूरी होगा कि प्रभावित हिस्से की मरम्मत के साथ पूरे प्लेटफॉर्म की बिजली व्यवस्था की भी जांच कराई जाए।
जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी नुकसान की तस्वीर
फिलहाल आग पर काबू पाने के बाद रेलवे अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं। प्रभावित वायरिंग, शेड और बिजली के उपकरणों का निरीक्षण किया जा रहा है। नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आग से रेलवे की संपत्ति को कितना नुकसान पहुंचा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन उपायों की जरूरत है।
टाटानगर रेलवे स्टेशन झारखंड के प्रमुख रेल केंद्रों में शामिल है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री अलग-अलग शहरों के लिए सफर करते हैं। ऐसे में स्टेशन के प्लेटफॉर्म, शेड और बिजली व्यवस्था की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। छोटी सी तकनीकी चूक भी बड़ी दुर्घटना का रूप ले सकती है। इसलिए नियमित निरीक्षण, खराब तारों को समय पर बदलना और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
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