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Jharkhand News: झारखंड में बदलेगी जीआरपी थानों और बैरकों की सूरत, जर्जर भवनों की मरम्मत और नए निर्माण की तैयारी

Jharkhand News: रेल डीजी अनिल पाल्टा के निर्देश और आईजी माइकल राज एस की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक; हाजत, मालखाना और बैरक की कमी दूर करने पर जोर

Jharkhand News: झारखंड में रेल यात्रियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली राजकीय रेल पुलिस (GRP) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू की गई है। लंबे समय से जर्जर भवनों, हाजत (Lock-up), मालखाना (Malkhana) और पुलिसकर्मियों के लिए बैरक जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही रेल पुलिस इकाइयों की अब सूरत बदलने जा रही है। इसके तहत राज्यभर में कहीं पुराने भवनों की मरम्मत कराई जाएगी, तो कहीं नए थाना भवन और बैरक बनाए जाएंगे।

वर्तमान में 23 रेल थाना, 5 ओपी और 10 पुलिस पोस्ट हैं संचालित

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में वर्तमान में कुल 23 राजकीय रेल थाना, 5 रेल आउटपोस्ट (OP) और 10 रेल पुलिस पोस्ट (PP) संचालित हो रहे हैं। इन सभी इकाइयों के माध्यम से रेलवे स्टेशनों और रेल परिसरों में होने वाले अपराधों की रोकथाम, यात्रियों की सुरक्षा, आपराधिक मामलों की जांच और विधि-व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व निभाया जाता है।

लेकिन, कई स्थानों पर रेल पुलिस के लिए उपलब्ध भवनों की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है। कई जगह जर्जर भवनों में थाने चल रहे हैं, तो कहीं पुलिसकर्मियों के रहने के लिए पर्याप्त आवासीय व्यवस्था या जरूरी सामान सुरक्षित रखने के साधन नहीं हैं।

रेल मुख्यालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक, अधिकारियों को दिए गए निर्देश

रेल पुलिस की आधारभूत संरचना और बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा को लेकर हाल ही में झारखंड रेल मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। रेल डीजी अनिल पाल्टा के निर्देश पर हुई इस बैठक की अध्यक्षता आईजी माइकल राज एस ने की। बैठक में धनबाद रेल एसपी, जमशेदपुर रेल एसपी, डीएसपी और अन्य संबंधित वरीय अधिकारी शामिल हुए। बैठक में सभी रेल थानों, ओपी और पुलिस पोस्ट के भवनों, बैरकों और अन्य जरूरी सुविधाओं की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

हाजत, मालखाना और बैरक की कमी सबसे बड़ी चुनौती

जीआरपी के कई थानों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय रहा है:

  • हाजत की कमी: कई थानों में हाजत (Lock-up) की समुचित व्यवस्था न होने के कारण गिरफ्तार अपराधियों को सुरक्षित रखने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

  • मालखाना का अभाव: चोरी, लूट और अन्य आपराधिक मामलों में बरामद माल व सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए मालखाना न होना बड़ी चुनौती है।

  • बैरक और आवासीय समस्या: पर्याप्त बैरक और शौचालय न होने के कारण दूर-दराज से ड्यूटी पर आने वाले पुलिसकर्मियों और जवानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए जिन स्थानों पर बैरक नहीं हैं, वहां नए निर्माण का प्रस्ताव भेजने की तैयारी है। वहीं, जिन स्थानों पर बैरक और भवनों की स्थिति जर्जर है, उसके संबंध में संबंधित मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशनों के विकास के साथ-साथ रेल पुलिस के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की यह पहल यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

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