मगध-आम्रपाली कोल प्रोजेक्ट मामले में फैसला, आधी सजा काटने के आधार पर मिली रिहाई
Tandwa Terror Funding: झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) से बड़ा फैसला आया है। टेरर फंडिंग मामले में दोषियों को राहत मिली। अदालत ने सात मुजरिमों की जमानत मंजूर की। यह मामला चतरा के टंडवा से जुड़ा है। मगध और आम्रपाली परियोजना में वसूली हुई थी। सभी दोषियों ने हस्तक्षेप याचिका दायर की थी। वे साढ़े छह साल से जेल में थे। आधी से ज्यादा सजा काटने पर राहत मिली। हाईकोर्ट के आदेश से हलचल तेज हो गई।
Tandwa Terror Funding: इन सात दोषियों को अदालत से मिली जमानत
जमानत पाने वालों में प्रमुख नाम शामिल हैं। विनोद कुमार गंझू को अदालत से राहत मिली। विंदेश्वर गंझू उर्फ विंदु गंझू को बेल मिली। साथ ही बीरबल गंझू को भी जमानत मिली। अदालत ने भीखन गंझू की अर्जी स्वीकार की। अमर सिंह भोक्ता को भी रिहाई मिलेगी। प्रेम विकास को भी कोर्ट से राहत मिली। अनिश्चय गंझू की जमानत याचिका भी मंजूर हुई। सभी आरोपियों के परिजनों में खुशी की लहर है।
Tandwa Terror Funding: एनआईए अदालत ने सुनाई थी 10 साल तक की सजा
रांची एनआईए अदालत ने पहले सजा सुनाई थी। 18 अगस्त को विशेष अदालत का फैसला आया। अदालत ने 12 दोषियों को सजा सुनाई थी। मुजरिमों को आठ से दस साल की सजा मिली। उन पर 40 से 90 हजार तक जुर्माना लगा। दोषियों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने लंबी जेल अवधि का मजबूत तर्क दिया। दोषियों ने साढ़े छह साल हिरासत में बिताए। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी स्वीकार की।
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में पूरी हुई। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत में बचाव पक्ष ने जोरदार दलीलें रखीं। अधिवक्ता बालाजी श्रीनिवासन ने दोषियों का पक्ष रखा। अधिवक्ता निरंजन कुमार ने भी अदालत में बहस की। अधिवक्ता प्रिया ने कानूनी बिंदुओं पर बात रखी। वकीलों ने आधी सजा पूरी होने का हवाला दिया। अदालत ने तथ्यों को देखकर जमानत आदेश दिया।
2016 में टंडवा थाने में दर्ज हुआ था केस
इस बहुचर्चित मामले की शुरुआत टंडवा से हुई। टंडवा थाना में कांड संख्या 2/2016 दर्ज हुआ था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने केस टेकओवर किया था। एनआईए ने 13 फरवरी 2018 को कमान संभाली। गहन छानबीन के बाद आरोप पत्र दाखिल हुआ। जांच एजेंसी ने 16 आरोपियों पर चार्जशीट दी। इसके बाद विशेष अदालत में ट्रायल शुरू हुआ। कई सालों तक मामले में गवाही और बहस चली।
टीपीसी उग्रवादियों को लेवी पहुंचाने का था आरोप
जांच में सिंडिकेट का बड़ा खुलासा हुआ था। सीसीएल कर्मियों और पुलिस की मिलीभगत सामने आई। शांति समिति और उग्रवादियों का गठजोड़ पकड़ा गया। उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी को फंड मिला। टीपीसी को लेवी देने की बात साबित हुई। इसके लिए कोयला ढुलाई का ठेका लिया गया। ऊंची दरों पर ढुलाई का काम कराया गया। इसी अवैध कमाई से उग्रवादियों को पैसा जाता था। अब मामले के सात दोषियों को जमानत मिली।
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