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Jharkhand Road Accidents: सड़कों पर टूटा कहर, छह माह में 2478 मौतें

हर दिन औसतन 14 लोगों की गई जान, तेज रफ्तार और अवैध पार्किंग बनी काल

Jharkhand Road Accidents: झारखंड की सड़कों पर तेज रफ्तार का कहर जारी है। इस साल छह माह में 2,478 लोगों की मौत हुई। जनवरी से जून 2026 के बीच 3,078 हादसे दर्ज हुए। औसतन हर रोज 17 दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रतिदिन करीब 14 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। यह स्थिति बेहद डरावनी और चिंताजनक है। सड़क सुरक्षा अब एक बड़ी मानवीय चुनौती बन गई है। पिछले पांच सालों में 19 हजार से ज्यादा मौतें हुईं। हर दिन कई घरों के चिराग बुझ रहे हैं। सरकार और समाज दोनों के लिए यह गंभीर मसला है। हाल के वर्षों की बात करें, तो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में तेज रफ्तार से जुड़ी 3,715 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 2,910 लोगों की मौत और 2,149 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा अभियान में गति नियंत्रण को प्रमुख मुद्दा बनाने की जरूरत को रेखांकित करता है।

Jharkhand Road Accidents: रांची और कोल्हान के जिलों में सबसे ज्यादा मौतें

राजधानी रांची हादसों के मामले में सबसे आगे रही। छह माह में रांची में 408 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 286 लोगों की दर्दनाक मौत हुई। धनबाद में 208 हादसों में 118 लोगों ने दम तोड़ा। हजारीबाग में 195 हादसों में 163 जानें गईं। गिरिडीह में 194 हादसों में 180 लोगों की मौत हुई। कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों में भी गंभीर स्थिति है। पूर्वी सिंहभूम में 166 हादसों में 117 मौतें हुईं। सरायकेला-खरसावां में 125 हादसों में 107 लोग मरे। पश्चिमी सिंहभूम में 117 दुर्घटनाओं में 114 मौतें दर्ज हुईं। पश्चिमी सिंहभूम में 2025 में 214 मौतें हुई थीं। पूर्वी सिंहभूम में 2025 में 176 जानें गई थीं। कोल्हान में दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है।

Jharkhand Road Accidents: पलामू से लेकर संथाल परगना तक पसरा मातम

अन्य जिलों के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। पलामू में 170 हादसों में 135 जानें गईं। बोकारो में 169 हादसों में 125 लोग मारे गए। गुमला में 150 हादसों में 136 मौतें दर्ज हुईं। दुमका में 134 हादसों में 122 जानें गईं। रामगढ़ में 126 हादसों में 107 लोग मारे गए। देवघर में 121 हादसों में 86 मौतें हुईं। चतरा में 84 हादसों में 77 लोग मरे। सिमडेगा में 83 हादसों में 82 जानें गईं। लातेहार में 65 और गोड्डा में 64 मौतें हुईं। साहिबगंज जिले में 55 लोगों ने दम तोड़ा। लोहरदगा में 51 और कोडरमा में 42 मौतें हुईं। पाकुड़ में 42 और जामताड़ा में 41 जानें गईं। इन जिलों में घायलों को समय पर इलाज नहीं मिला।

शाम के समय सबसे अधिक दुर्घटनाएं, तेज रफ्तार बनी वजह

एनसीआरबी 2024 के आंकड़े रफ्तार की भयावहता बताते हैं। वर्ष 2024 में ओवरस्पीडिंग से 3,715 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 2,910 लोगों की दर्दनाक मौत हुई। शाम छह से नौ बजे तक 1,079 हादसे हुए। दोपहर तीन से छह बजे तक 946 दुर्घटनाएं हुईं। दोपहर 12 से तीन बजे के बीच 706 हादसे हुए। सुबह नौ से 12 बजे तक 658 दुर्घटनाएं हुईं। शाम में अंधेरा और तेज गति मुख्य कारण बने। शराब पीकर गाड़ी चलाना और ओवरटेकिंग भी जानलेवा रहे। मोबाइल का इस्तेमाल भी हादसों को न्योता दे रहा। नेशनल हाईवे पर 2024 में 354 जानें गईं। वर्ष 2025 में हाईवे पर 326 मौतें हुईं। जमशेदपुर से घाटशिला और बहरागोड़ा मार्ग पर जोखिम है। चाईबासा और मुसाबनी मार्ग पर भी भारी खतरे हैं। हाईवे पर ब्लैक स्पॉट की संख्या बहुत अधिक है।

परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा ने की अवैध पार्किंग हटाने की अपील

सड़कों पर अवैध पार्किंग से लगातार हादसे हो रहे हैं। परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा ने कड़े निर्देश दिए। उन्होंने उपायुक्तों, डीटीओ और एमवीआई को निगरानी बढ़ाने को कहा। मुख्य सड़कों पर गाड़ी खड़ी करने वालों पर कार्रवाई होगी। गैराज और वाशिंग सेंटरों से नियम पालन को कहा। युवाओं से भी यातायात नियमों के पालन की अपील की। अंधेरे में खड़ी गाड़ियां जानलेवा साबित होती हैं। बिना बत्ती खड़े भारी वाहन मौत का फंदा बनते हैं। ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार बहुत जरूरी है। आईआरएडी पोर्टल के जरिए हादसों का विश्लेषण जारी है। नियमों की अनदेखी करने वालों के चालान काटे जा रहे।

सामूहिक प्रयासों और त्वरित इलाज से ही थमेगा हादसों का दौर

सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है। गोल्डन ऑवर में इलाज से कई जानें बचेंगी। ट्रॉमा सेंटर और एंबुलेंस सेवा को मजबूत किया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग को त्वरित रिस्पांस टाइम तय करना होगा। चालकों को हेलमेट और सीट बेल्ट लगाना होगा। अनियंत्रित कट और खराब सड़क डिजाइन में सुधार जरूरी है। सामूहिक जागरूकता से ही झारखंड में सफर सुरक्षित होगा। सभी नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। तभी सड़कें विकास का रास्ता बन सकेंगी। सतर्कता ही हादसों से बचने का एकमात्र उपाय है।

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