Judicial Exam Rule : उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने जज बनने की शुरुआती परीक्षा में शामिल होने के लिए जरूरी वकालत के अनुभव की अवधि तीन साल से घटाकर एक साल कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। हालांकि, परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण के साथ एक साल की क्लर्कशिप भी करनी होगी। फैसले से उन कानून स्नातकों को राहत मिल सकती है, जो न्यायिक सेवा में जल्द प्रवेश करना चाहते हैं।
Judicial Exam Rule: परीक्षा के लिए पुराना अनुभव भी मान्य
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मई 2025 से मार्च 2027 के बीच आयोजित होने वाली परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को उनके पहले से अर्जित वकालत के अनुभव का लाभ मिलेगा। अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने की पात्रता को लेकर पहले से बहस चल रही थी।
दरअसल, 20 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए तीन साल की वकालत का अनुभव अनिवार्य करने का आदेश दिया था। इसके बाद इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की गईं। अब अदालत ने अनुभव की अवधि घटाकर एक साल करने का फैसला किया है।
Judicial Exam Rule: लॉ ग्रेजुएट के लिए बदला नियम
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस की ओर से दायर याचिका में तीन साल की अनिवार्य प्रैक्टिस की शर्त पर सवाल उठाया गया था। याचिका में पांच विधि आयोगों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया था कि इन रिपोर्टों में जज बनने के लिए तीन साल की वकालत की अनिवार्यता का समर्थन नहीं किया गया था।
याचिका में दूसरे न्यायिक वेतन आयोग की 2022 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया था। इसमें ऐसी बाध्यता लागू करने से पहले संबंधित सभी पक्षों से विचार-विमर्श करने पर जोर दिया गया था। इसी पृष्ठभूमि में अदालत के नए फैसले को न्यायिक सेवा परीक्षा की पात्रता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
Judicial Service: 2002 में खत्म हुई थी तीन साल की शर्त
न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए वकालत के अनुभव की शर्त का इतिहास भी महत्वपूर्ण है। शुरुआत में जज बनने के लिए वकील के तौर पर तीन साल का अनुभव जरूरी था। लेकिन 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने इस तीन साल की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया था। इसके बाद नए लॉ ग्रेजुएट्स के लिए भी न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होकर जज बनने का रास्ता खुल गया था।
अब अदालत के ताजा फैसले के तहत शुरुआती परीक्षा में शामिल होने के लिए एक साल का वकालत अनुभव जरूरी होगा। चयनित अभ्यर्थियों को न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण के साथ एक साल की क्लर्कशिप पूरी करनी होगी। इससे न्यायिक सेवा में आने वाले नए अभ्यर्थियों के लिए पात्रता और प्रशिक्षण, दोनों को लेकर व्यवस्था में बदलाव हुआ है।
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