Jharkhand Student Agitation: झारखंड में छात्र आंदोलन के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन (Champai Soren) ने छात्र आंदोलन को लेकर हेमंत सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि सरकार झुकी जरूर है, लेकिन छात्रों की जीत अभी आधी-अधूरी है।
Jharkhand Student Agitation: बारिश, लाठीचार्ज में भी डटे रहे युवा
चंपाई सोरेन ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और फेसबुक पर बयान जारी कर आंदोलनकारी युवाओं के संघर्ष की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि तेज बारिश, सरकार की बेरुखी, लाठीचार्ज और धरना स्थल पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद युवाओं ने जिस अनुशासन और दृढ़ता के साथ आंदोलन जारी रखा, वह अभूतपूर्व है। यह आंदोलन सिर्फ परीक्षा रद्द कराने का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को सुधारने का आंदोलन है। 24 दिनों तक चले इस संघर्ष ने दिखा दिया कि युवा अब अपने भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।
Jharkhand Student Agitation: केस वापस लो, सीबीआई जांच कराओ
पूर्व सीएम ने कहा कि इस आंदोलन के दौरान सरकार की तरफ से कई तरह की कोशिशें हुईं। छात्रों के संघर्ष को गलत साबित करने, आंदोलन में फूट डालने, मुद्दे से भटकाने और आंदोलन को दबाने की हर कोशिश की गई। युवाओं को ये सब याद रखना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर जो मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए। अपने हक और भविष्य के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर इस पूरे परीक्षा विवाद की सीबीआई जांच की मांग दोहराई।
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आधी जीत नहीं, पूरी पारदर्शिता चाहिए
चंपाई सोरेन ने कहा कि सीजीएल और टीडीपीएल परीक्षा रद्द करना और सीआईडी जांच का ऐलान सरकार का झुकना तो है, लेकिन इसे पूरी जीत नहीं कहा जा सकता। जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से नहीं होती, तब तक युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस बार निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों को भी इसी तरह की पीड़ा और अनियमितताओं का सामना करना पड़ेगा। यह लड़ाई सिर्फ आज के दो हजार नौकरियों की नहीं, बल्कि कल के लाखों युवाओं के भरोसे की है।
संघर्ष के पहले चरण की बधाई
पूर्व मुख्यमंत्री ने आंदोलनरत छात्रों को संघर्ष के पहले चरण में मिली सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत युवाओं ने अपने संघर्ष, एकता और अनुशासन के दम पर हासिल की है। उन्होंने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह आंदोलन झारखंड के इतिहास में याद रखा जाएगा। सरकार को अब युवाओं के साथ संवाद कर भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न बने।
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