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Tata Sons Chairman: एन. चंद्रशेखरन का बड़ा फैसला, फरवरी 2027 के बाद नहीं संभालेंगे टाटा संस की कमान

Tata Sons Chairman: टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N. Chandrashekhran) ने बुधवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने के बाद चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। इस फैसले के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

चंद्रशेखरन के फैसले के बाद टाटा शेयरों में भारी गिरावट

एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व परिवर्तन से जुड़ी घोषणा के बाद निवेशकों की चिंता का असर शेयर बाजार में साफ दिखाई दिया। टाटा ग्रुप की कई प्रमुख कंपनियों के शेयर बुधवार को दबाव में रहे। टाटा ग्रुप की कंपनियों के बाजार मूल्य में करीब 46,000 करोड़ रुपये की कमी आई।

Tata Consultancy Services (TCS) के शेयर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। NSE पर TCS का शेयर करीब 5.95 फीसदी गिरकर 2,300.10 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं Tata Motors Passenger Vehicles के शेयर में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई।

इसके अलावा Tata Steel का शेयर भी 2 फीसदी से ज्यादा गिरकर 183.60 रुपये के आसपास पहुंच गया। Tata Elxsi, Tata Communications, Tata Technologies, Tata Power और Trent के शेयरों में भी करीब 2 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।

Tata Sons चेयरमैन: कर्मचारियों से बोले चंद्रशेखरन- अटकलों पर ध्यान न दें

अपने फैसले के बाद एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार दोपहर बॉम्बे हाउस में कर्मचारियों के साथ टाउन हॉल बैठक की। इस दौरान उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों और साजिश की चर्चाओं पर ध्यान नहीं देने की अपील की।

चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप के साथ अपने करीब चार दशक लंबे सफर को याद किया और कर्मचारियों के प्यार एवं समर्थन के लिए आभार जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फरवरी 2027 में उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे।

एक बोर्ड सदस्य के समर्थन नहीं देने से अटका था कार्यकाल विस्तार

चंद्रशेखरन ने अपने बयान में बताया कि Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust ने उनके अगले कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस प्रस्ताव को Tata Sons की Nomination and Remuneration Committee और बोर्ड की ओर से भी आगे बढ़ाया गया था।

यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को Tata Sons बोर्ड की बैठक में रखा गया था। हालांकि, चंद्रशेखरन के मुताबिक बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के बाद उन्होंने उस समय फैसला टालने का विकल्प चुना।

अब चंद्रशेखरन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करने के बाद अगले कार्यकाल के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे।

2017 में संभाली थी Tata Sons की कमान

एन. चंद्रशेखरन ने 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले उन्होंने लंबे समय तक Tata Consultancy Services यानी TCS में काम किया और कंपनी के CEO पद तक पहुंचे।

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने पारंपरिक कारोबारों के अलावा कई नए क्षेत्रों में भी विस्तार किया। उनके कार्यकाल में समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, डिजिटल बिजनेस, एविएशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया। एयर इंडिया का अधिग्रहण भी उनके कार्यकाल के बड़े फैसलों में शामिल रहा।

Tata Sons Chairman: एन. चंद्रशेखरन ने कहां से की पढ़ाई?

एन. चंद्रशेखरन ने IIT से पढ़ाई नहीं की है। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने Coimbatore Institute of Technology से Applied Sciences में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद 1986 में उन्होंने Regional Engineering College, Tiruchirappalli से Master of Computer Applications (MCA) की डिग्री हासिल की। यह संस्थान अब NIT Trichy के नाम से जाना जाता है।

Tata Sons के बोर्ड में कौन-कौन हैं?

Tata Sons के बोर्ड में वर्तमान में छह निदेशक हैं। इनमें चेयरमैन N. Chandrasekaran, Tata Trusts के चेयरमैन Noel N. Tata, Tata Trusts के वाइस चेयरमैन Venu Srinivasan, ग्रुप CFO Saurabh Agrawal और स्वतंत्र निदेशक Harish Manwani तथा Anita Marangoly George शामिल हैं।

नोएल टाटा, रतन टाटा के सौतेले भाई हैं और 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद Tata Trusts के चेयरमैन बने थे।

अब टाटा ग्रुप के अगले चेयरमैन पर नजर

एन. चंद्रशेखरन के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल Tata Sons के अगले चेयरमैन को लेकर है। Tata Sons टाटा ग्रुप की प्रमुख निवेश होल्डिंग कंपनी है और Tata Trusts की इसमें करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

ऐसे में अगले चेयरमैन का चयन टाटा ग्रुप के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। चंद्रशेखरन के फैसले के बाद बाजार और उद्योग जगत की नजर अब इस बात पर रहेगी कि Tata Sons नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाता है और समूह की कमान किसके हाथों में जाती है।

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