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Jharkhand News: झारखंड में करैत और रसेल वाइपर का बढ़ता खतरा, जागरूकता और समय पर इलाज से बच सकती है जान

  • दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोको पायलटों को सर्पदंश की पहचान, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रबंधन की दी गई जानकारी, अंधविश्वास से बचने की अपील।

Jharkhand: जहरीले सांपों के बढ़ते खतरे को देखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के इलेक्ट्रिक लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र में शुक्रवार को रेल सिविल डिफेंस की ओर से सर्पदंश रोकथाम, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोको पायलटों को आपातकालीन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने, सांपों की पहचान करने और समय पर प्राथमिक उपचार देने के बारे में जागरूक करना था।

Jharkhand News: राष्ट्रपति पदक से सम्मानित संतोष कुमार ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल सिविल डिफेंस के इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति पदक से सम्मानित संतोष कुमार ने बताया कि झारखंड में करैत (Krait) और रसेल वाइपर (Russell’s Viper) सबसे अधिक खतरनाक विषैले सांपों में शामिल हैं। इन दोनों प्रजातियों के कारण राज्य में हर वर्ष बड़ी संख्या में सर्पदंश के मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सांप की सही पहचान कर मरीज को तुरंत प्राथमिक उपचार देते हुए अस्पताल पहुंचाया जाए, तो अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है।

करैत सांप क्यों है सबसे ज्यादा खतरनाक?

संतोष कुमार ने बताया कि करैत मुख्य रूप से रात के समय सक्रिय रहता है और कई बार सो रहे व्यक्ति को भी काट लेता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि काटने के बाद शुरुआती समय में दर्द बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। इसी कारण लोग इसे सामान्य कीड़े के काटने की घटना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है और स्थिति गंभीर हो सकती है।

Jharkhand News: रसेल वाइपर कहां मिलता है?

रसेल वाइपर अक्सर खेतों, पत्थरों के बीच, लकड़ियों के ढेर, झाड़ियों और ईंटों के आसपास छिपा रहता है। इसके काटने पर दांतों के स्पष्ट निशान दिखाई देते हैं। यदि मरीज को समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया जाए और उचित इलाज मिले, तो उसकी जान बचाई जा सकती है।

सर्पदंश होने पर क्या करें? जानिए विशेषज्ञ की सलाह

संतोष कुमार ने लोगों से अपील की कि सर्पदंश की स्थिति में घबराएं नहीं बल्कि मरीज का मनोबल बनाए रखें।

उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें बताईं—

  • मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
  • झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या ओझा-गुनी के चक्कर में समय बिल्कुल न गंवाएं।
  • केवल वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार पर भरोसा करें।
  • समय पर इलाज ही सर्पदंश से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

Jharkhand News: झारखंड सरकार देती है 4 लाख रुपये की सहायता

प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि झारखंड सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सर्पदंश से मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का प्रावधान है। हालांकि विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि सही समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया गया?

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया।

इसमें शामिल थे—

  • डिजिटल प्रेजेंटेशन
  • पावर प्वाइंट प्रस्तुति
  • टेली फिल्म
  • डमी सर्पों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण

इसके जरिए विषैले और विषहीन सांपों की पहचान, सर्पदंश के लक्षण, प्राथमिक उपचार तथा न्यूरोटॉक्सिक, हेमोटॉक्सिक और मायोटॉक्सिक विष के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी गई।

Jharkhand News: भारत में कितनी प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं?

विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में लगभग 275 प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, लेकिन इनमें से केवल सीमित संख्या ही विषैली होती है। इसलिए हर सर्पदंश को घातक मानकर घबराने की बजाय तुरंत चिकित्सकीय जांच और उचित उपचार कराना सबसे जरूरी है।

140 लोको पायलटों ने लिया प्रशिक्षण

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में रांची, आद्रा, खड़गपुर और चक्रधरपुर मंडल से आए लगभग 140 वरिष्ठ एवं सहायक लोको पायलटों ने भाग लिया। इनमें वंदे भारत, मेल, एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ियों में कार्यरत लोको पायलट शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान आपदा प्रबंधन और सर्पदंश से बचाव के व्यावहारिक उपायों पर विशेष जोर दिया गया।

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