- इमरजेंसी विभाग पर बढ़ते दबाव और डॉक्टरों पर हिंसा को लेकर विशेषज्ञों ने जताई चिंता
Jamshedpur: किसी भी अस्पताल का इमरजेंसी विभाग (Emergency Department-ED) मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा इकाई माना जाता है। यही कारण है कि इसे अस्पताल की “धड़कन” भी कहा जाता है। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, सड़क दुर्घटना, सांस संबंधी गंभीर बीमारी, सेप्सिस और अन्य जानलेवा परिस्थितियों में यह विभाग 24 घंटे लगातार सेवाएं प्रदान करता है। विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस (World Emergency Medicine Day) प्रत्येक वर्ष 27 मई को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के महत्व और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
आपातकालीन चिकित्सा विभाग स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़
विशेषज्ञों के अनुसार इमरजेंसी विभाग केवल गंभीर मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अस्पताल में भर्ती होने वाले बड़ी संख्या में मरीजों के उपचार संबंधी निर्णय भी करता है। प्राकृतिक आपदाओं, महामारी और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के समय यही विभाग सबसे पहली प्रतिक्रिया देने वाली इकाई के रूप में कार्य करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती काफी हद तक उसके आपातकालीन चिकित्सा तंत्र पर निर्भर करती है। आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में इमरजेंसी मेडिसिन अब एक विशेष विशेषज्ञता के रूप में विकसित हो चुकी है।
भारत में 1995 से शुरू हुई Emergency Medicine की विशेष पढ़ाई
आपातकालीन चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर संगठित पहचान मिलने के बाद भारत में भी वर्ष 1995 से इसे एक विशेष चिकित्सा शाखा के रूप में विकसित किया गया। इस विशेषज्ञता के अंतर्गत ट्रॉमा केयर, क्रिटिकल केयर, टॉक्सिकोलॉजी, रिससिटेशन और आपातकालीन प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं और हृदय रोगों के मामलों में वृद्धि के कारण Emergency Medicine की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
World Emergency Medicine Day 2026 की थीम
इस वर्ष World Emergency Medicine Day 2026 की थीम —
“Safe Space for Emergency Medicine Teams – Stop Violence Everywhere”
रखी गई है। यह थीम डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करती है।इमरजेंसी विभागों में मरीजों की अधिक संख्या, मानसिक तनाव और भावनात्मक दबाव के कारण कई बार डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को गाली-गलौज, धमकी और शारीरिक हिंसा जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर होने वाली हिंसा केवल कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित करता है। ऐसी घटनाओं से डॉक्टर मानसिक दबाव में आ जाते हैं, जिसका असर उपचार व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अस्पतालों में सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और जन-जागरूकता बेहद जरूरी है ताकि स्वास्थ्यकर्मी बिना भय के अपना कार्य कर सकें।
स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान
भारत में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न कानूनी प्रावधान लागू हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने Epidemic Diseases (Amendment) Act, 2020 लागू किया था, जिसके तहत स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध घोषित किया गया। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत भी डॉक्टरों और अस्पताल संपत्ति पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
Tata Main Hospital का इमरजेंसी विभाग प्रतिदिन संभालता है 200 से अधिक मरीज
Tata Main Hospital का इमरजेंसी विभाग गंभीर मरीजों के उपचार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित मेडिकल टीम के साथ लगातार कार्य करता है। विभाग में मेडिकल ऑफिसर, इमरजेंसी फिजिशियन, जनरल फिजिशियन, सर्जन तथा अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर 24×7 उपलब्ध रहते हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार विभाग में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीजों का इलाज किया जाता है, जबकि मौसमी बीमारियों के दौरान यह संख्या 500 तक पहुंच जाती है। अस्पताल नियमित मॉक ड्रिल, आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और गुणवत्ता जांच कार्यक्रमों के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी बनाए रखता है।
स्वास्थ्यकर्मियों को किया नमन
टाटा मेन हॉस्पिटल की Head Consultant & HOD, Emergency Medicine
Dr. Binita Panigrahi ने कहा कि इमरजेंसी चिकित्सा से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी कठिन परिस्थितियों में लगातार कार्य करते हुए अनगिनत लोगों की जान बचाते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए Emergency Care को और अधिक सशक्त बनाना तथा डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
(लेखिका : डॉ. बिनीता पाणिग्रही टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH), इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की जमशेदपुर की हेड कंसल्टेंट व एचओडी है।)
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