- मुंडारी जमीन पर बने 12 मकानों को तोड़ने के मामले में अदालत सख्त, शपथ पत्र में तथ्य छिपाने और न्यायालय को गुमराह करने पर उठाए सवाल
Ranchi: के खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 मकानों को तोड़े जाने के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई हुई। मामले में Mahadev Uraon द्वारा दायर अवमानना याचिका पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रार्थी को अवमानना नोटिस जारी किया है।
न्यायालय ने झूठे तथ्यों पर जताई आपत्ति
मामले की सुनवाई Rajesh Shankar की अदालत में हुई। अदालत के आदेश के आलोक में प्रतिवादियों और पीड़ित परिवारों की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका पर प्रार्थी की ओर से जवाब दाखिल किया गया। प्रार्थी के जवाब से असंतुष्ट अदालत ने कहा कि शपथ पत्र में झूठे तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया है |
पैसे के लेन-देन की जानकारी छिपाने का आरोप
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हस्तक्षेपकर्ताओं से कथित रूप से हुए पैसे के लेन-देन की जानकारी छिपाई गई है। इस पर अदालत ने महादेव उरांव से पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना और अन्य फौजदारी कानूनों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।न्यायालय ने इस संबंध में उनसे विस्तृत जवाब मांगा है।
पीड़ित परिवारों को राहत जारी
सुनवाई के दौरान अदालत ने हस्तक्षेपकर्ताओं यानी प्रभावित परिवारों को पहले दी गई अंतरिम राहत को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया। इसके तहत उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की पीड़क कार्रवाई पर फिलहाल रोक बरकरार रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 19 जून को निर्धारित की गई है। पीड़ित परिवारों की ओर से अधिवक्ता Gaurav Raj ने अदालत में पक्ष रखा।
बुलडोजर कार्रवाई पर भी उठे सवाल
पूर्व की सुनवाई में Hehal Circle Office की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया था। जवाब में कहा गया था कि हस्तक्षेपकर्ताओं को तीन बार नोटिस जारी किया गया, लेकिन आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि केवल कब्जा हटाने के बजाय मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई क्यों की गई।
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन ने खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 मकानों को तोड़ने का आदेश दिया था। बुलडोजर कार्रवाई शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से जमीन खरीदी थी और वर्षों से वहां रह रहे हैं। लोगों के अनुसार, 38.25 डिसमिल जमीन के लिए उन्होंने लगभग 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया था, लेकिन अब उन्हें बेदखल किया जा रहा है।



