शाम 05:48 से 07:43 तक प्रदोष काल और वृषभ लग्न का श्रेष्ठ संयोग, 10 को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भैयादूज
Diwali Lakshmi Muhurat के तहत प्रकाश और समृद्धि का महापर्व दीपावली रविवार 8 नवंबर को देश और राज्यभर में अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) तथा 11 नवंबर को भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक भैयादूज का पावन पर्व मनाया जाएगा। बाजारों में रंग-बिरंगी विद्युत झालरों, मिट्टी के पारंपरिक दीयों, ताजे फूलों, खील-बताशों और स्वादिष्ट मिठाइयों की दुकानें सज चुकी हैं। चारों तरफ उत्सव का उल्लास नजर आ रहा है। इस पांच दिवसीय दीपोत्सव के केंद्र में सिद्धि विनायक भगवान गणेश और धन-धान्य व ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है।
Diwali Lakshmi Muhurat: स्थिर लग्न में पूजन अत्यंत फलदायी
पंडित एके मिश्रा के अनुसार दीपावली पर मां लक्ष्मी के पूजन के लिए स्थिर लग्न को सबसे उत्तम और कल्याणकारी माना जाता है। पंडित एके मिश्रा ने बताया कि 8 नवंबर को दीपावली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन शाम को मां लक्ष्मी के पूजन का मुख्य शुभ समय शाम 5 बजकर 48 मिनट से शाम 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। सुबह 11:28 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके उपरांत पुण्यकारिणी अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या तिथि की रात्रि में ही माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान गणेश की विशेष आराधना का शास्त्रीय विधान है। शाम को करीब 05:25 मिनट पर सूर्यास्त होगा, जिसके तुरंत बाद प्रदोष काल का आरंभ होगा। यह प्रदोष काल रात्रि करीब 08:02 मिनट तक व्याप्त रहेगा।
Diwali Lakshmi Muhurat: वृषभ व सिंह लग्न और निशिता काल की पूरी जानकारी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की आराधना करने से परिवार और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में धन, धान्य और सुख-समृद्धि का स्थायी वास रहता है। शाम के समय स्थिर वृषभ लग्न और प्रदोष काल का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो गृहस्थों और व्यापारियों के लिए सबसे शुभ फलदायी है। इसके अतिरिक्त तांत्रिक साधना, तंत्र-मंत्र और विशेष अनुष्ठान करने वाले साधकों के लिए मध्यरात्रि का समय निर्धारित है।
पंचांग के अनुसार मुख्य शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल एवं वृषभ लग्न का संयुक्त समय) शाम 5 बजकर 48 मिनट से रात्रि 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। वहीं सामान्य प्रदोष काल शाम 5 बजकर 31 मिनट से रात्रि 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। स्थिर वृषभ लग्न शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात्रि 7 बजकर 50 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद मध्यरात्रि में महानिशीथ काल यानी निशिता काल का मुहूर्त रात 11 बजकर 38 मिनट से देर रात 12 बजकर 31 मिनट (9 नवंबर की भोर) तक रहेगा। सिंह लग्न की बात करें तो मध्यरात्रि में स्थिर सिंह लग्न रात 12 बजकर 25 मिनट से रात 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जिसमें उद्योगपति, व्यापारी और साधक अपने बही-खाते और विशेष पूजा संपन्न कर सकते हैं।
गोवर्धन पूजा और भैयादूज की तिथियां तय, घरों और प्रतिष्ठानों में तैयारियां तेज
पांच दिवसीय दीपोत्सव की श्रृंखला में धनतेरस के बाद दीपावली का मुख्य पूजन 8 नवंबर को संपन्न होगा। इसके बाद 10 नवंबर को अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किए जाएंगे और गायों की विशेष सेवा की जाएगी। अगले दिन 11 नवंबर को भैयादूज का पावन त्योहार मनाया जाएगा, जिसमें बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके सुखी जीवन और दीर्घायु की कामना करेंगी। शुभ मुहूर्त की स्पष्टता होने से श्रद्धालुओं और कारोबारियों ने अपनी पूजा की तैयारियां समय से पूरी करने की रूपरेखा तैयार कर ली है।
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