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Arjun Munda Convoy: सुरक्षा वाहनों की हालत पर उठे सवाल

चौका में काफिले की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद पूर्व सीएम ने जताई नाराजगी, छह बार पत्र लिखने के बावजूद नहीं बदली गईं गाड़ियां

Arjun Munda Convoy : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल हो रहे सरकारी वाहनों की जर्जर स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराए गए वाहनों की हालत बेहद खराब है। बार-बार तकनीकी खराबी आने के बावजूद उन्हें बदलने के बजाय सामान्य मरम्मत कर दोबारा ड्यूटी में लगा दिया जाता है। यह स्थिति केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं है। इससे दिन-रात ड्यूटी करने वाले सुरक्षाकर्मियों की जान भी जोखिम में पड़ रही है। छह नवंबर की रात चौका के पास उनके सुरक्षा काफिले का एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।

Arjun Munda Convoy में दुर्घटना के बाद सामने आई समस्या

घटना छह नवंबर की शाम की है। अर्जुन मुंडा खूंटी से जमशेदपुर लौट रहे थे। इसी दौरान सरायकेला-खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र स्थित चावलीबासा के पास एनएच-33 पर उनके सुरक्षा काफिले के वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए। अचानक एक कार के काफिले के बीच आ जाने के बाद वाहनों को ब्रेक लगाना पड़ा। इस दौरान पीछे चल रहे वाहन आपस में टकरा गए। हादसे में काफिले के वाहन क्षतिग्रस्त हुए। हालांकि, अर्जुन मुंडा और उनके साथ चल रहे सभी सुरक्षाकर्मी सुरक्षित रहे। किसी को गंभीर चोट नहीं आई।

पूर्व सीएम व पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के सुरक्षा काफिले में शामिल वाहन की स्थिति.

Arjun Munda Convoy: छह बार अधिकारियों को पत्र लिखकर दी गई जानकारी

अर्जुन मुंडा ने बताया कि सुरक्षा वाहनों की खराब स्थिति को लेकर उनका कार्यालय लगातार संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराता रहा है। इस संबंध में छह बार लिखित रूप से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 28 जुलाई 2024, 22 अगस्त 2024, 19 अप्रैल 2025, 11 सितंबर 2025, 9 मार्च 2026 और 29 जून 2026 को अधिकारियों को पत्र भेजे गए थे।

इन पत्रों में वाहनों की जर्जर हालत, बार-बार सामने आने वाली तकनीकी खराबियों और उनसे सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अर्जुन मुंडा का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया।

गृह विभाग के आदेश के बाद भी नहीं बदले गए वाहन

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके कार्यालय की ओर से लगातार पत्राचार किए जाने के बाद गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने भी 14 मार्च 2026 को आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश जारी किया था। इसके बावजूद सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल किए जा रहे पुराने वाहनों को नहीं बदला गया।

उनका कहना है कि विभागीय स्तर पर निर्देश जारी होने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं दिया। वाहनों की मरम्मत कर उन्हें फिर से सुरक्षा ड्यूटी में लगा दिया जाता है। कुछ ही दिनों बाद उनमें दोबारा तकनीकी खराबी आने लगती है। अर्जुन मुंडा के अनुसार, शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता है, जब इन वाहनों में कोई न कोई परेशानी सामने नहीं आती हो।

सायरन और झंडे नहीं होने से भी बढ़ रहा जोखिम

अर्जुन मुंडा ने सुरक्षा काफिले के वाहनों में पहचान संबंधी व्यवस्थाओं की कमी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई वाहनों में सायरन और झंडे जैसी जरूरी पहचान की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण सड़क पर चलने वाले दूसरे वाहन चालकों को यह समझने में परेशानी होती है कि कोई सुरक्षा काफिला गुजर रहा है।

कई बार दूसरे वाहन काफिले के बीच में प्रवेश कर जाते हैं। इससे काफिले की गति और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में अचानक ब्रेक लगाने या वाहनों की दिशा बदलने की नौबत आ सकती है। इससे सड़क दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। उनके अनुसार, सुरक्षा काफिले में शामिल सभी वाहनों की तकनीकी स्थिति के साथ उनकी पहचान संबंधी व्यवस्था भी दुरुस्त होनी चाहिए।

बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी?

लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर अर्जुन मुंडा ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए और कितनी बार पत्र लिखना पड़ेगा।

उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। साथ ही सुरक्षा काफिले के लिए सुरक्षित, आधुनिक और तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने पूरी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने पर भी जोर दिया है।

अर्जुन मुंडा की मांग है कि केवल वाहनों की मरम्मत तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनकी फिटनेस, तकनीकी क्षमता और नियमित रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। छह नवंबर की दुर्घटना में सभी लोगों के सुरक्षित रहने से राहत जरूर मिली है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा वाहनों की स्थिति और उनकी उपयोगिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।

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