चाईबासा उपभोक्ता आयोग ने फैब होटल को माना सेवा में कमी का दोषी, बुजुर्ग दंपत्ति को आधी रात सड़क पर भटकने पर सुनाया सख्त फैसला
Chaibasa Consumer Court: ऑनलाइन होटल बुकिंग की पूरी राशि वसूलने के बाद ग्राहक को कमरा देने से मुकरना निजी होटल प्रबंधन को भारी पड़ गया। मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले का है। पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चाईबासा ने मामले की सुनवाई करते हुए होटल प्रबंधन को सेवा में गंभीर कमी और व्यावसायिक कदाचार का दोषी ठहराया है। आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने पीड़ित उपभोक्ता मोहम्मद बारिक के पक्ष में एकपक्षीय फैसला सुनाते हुए होटल प्रबंधन के दोनों विपक्षी पक्षों को संयुक्त एवं अलग-अलग रूप से कुल 30,670 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का कड़ा आदेश जारी किया है।
Chaibasa Consumer Court: चाईबासा के बुजुर्ग दंपत्ति का मामला, कोलकाता में रात भर भटके
यह पूरा विवाद चाईबासा नगर परिषद क्षेत्र स्थित 56बी, हिंद चौक, बड़ी बाजार निवासी मोहम्मद बारिक से जुड़ा है। मोहम्मद बारिक के पुत्र रजीक अनवर ने अपने वृद्ध माता-पिता के कोलकाता में सुरक्षित प्रवास के लिए ऑनलाइन होटल बुकिंग की थी। उन्होंने कोलकाता के राजडांगा स्थित ‘फैब होटल गेस्ट ओ पैलेस’ में 10 से 12 मई 2026 तक के लिए कमरा आरक्षित कराया था।
इसके लिए बुकिंग के समय ही पूरे 5,670 रुपये का ऑनलाइन अग्रिम भुगतान कर दिया गया था। निर्धारित तिथि 10 मई की रात करीब 9:00 से 10:00 बजे के बीच जब मोहम्मद बारिक अपनी धर्मपत्नी मनीला पिंगुआ के साथ थके-हारे होटल पहुंचे, तो होटल प्रबंधन ने बुकिंग स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। प्रबंधन ने उन्हें कमरा उपलब्ध कराने से मना कर दिया। आधी रात को अनजान शहर में बुजुर्ग दंपत्ति को दूसरा होटल ढूंढने के लिए दर-दर भटकना पड़ा, जिससे उन्हें असहनीय शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
Chaibasa Consumer Court: नोटिस पर हाजिर न होने पर की एकपक्षीय सुनवाई, सेवा में कमी सिद्ध
चाईबासा लौटने के बाद मोहम्मद बारिक ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में परिवाद संख्या दर्ज कराई। उन्होंने जमा कराई गई बुकिंग राशि वापस दिलाने तथा मानसिक प्रताड़ना व आर्थिक क्षति के एवज में 60 हजार रुपये मुआवजे की गुहार लगाई थी। सुनवाई के दौरान परिवादी ने ऑनलाइन भुगतान की रसीद, बैंक खाते का विवरण और यात्रा टिकट सहित सभी ठोस दस्तावेजी साक्ष्य आयोग के समक्ष पेश किए। उनकी पत्नी मनीला पिंगुआ ने भी आयोग में उपस्थित होकर गवाही दी।
दूसरी ओर आयोग द्वारा फैब होटल के दोनों विपक्षी पक्षों को विधिवत नोटिस तामील कराया गया था। इसके बावजूद होटल प्रबंधन का कोई भी प्रतिनिधि न तो आयोग के समक्ष उपस्थित हुआ और न ही अपना लिखित पक्ष रखा। इसके बाद आयोग ने साक्ष्यों के आधार पर मामले की एकपक्षीय सुनवाई पूरी की। आयोग ने पाया कि अग्रिम भुगतान लेने के बाद कमरा न देना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2(11) के तहत सेवा में घोर कमी है।
45 दिनों में 30,670 रुपये का भुगतान करने का फरमान, देरी होने पर लगेगा 9 फीसदी ब्याज
आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने अपने ऐतिहासिक फैसले में होटल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने आदेश दिया कि होटल प्रबंधन परिवादी को मूल बुकिंग राशि के रूप में 5,670 रुपये तुरंत वापस लौटाए। इसके अतिरिक्त आधी रात को बुजुर्ग दंपत्ति को हुई भीषण असुविधा और मानसिक प्रताड़ना के एवज में 20,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए।
साथ ही कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में 5,000 रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए। इस तरह होटल को कुल 30,670 रुपये की राशि आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो परिवादी को पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक दर से साधारण ब्याज भी देय होगा।
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