सात कोषागारों में वेतन मद से फर्जी निकासी का मामला, सरकार को सौंपी जाएगी पहली रिपोर्ट
Bokaro Treasury Scam: झारखंड के बहुचर्चित कोषागार वेतन फर्जीवाड़ा मामले में एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय विशेष जांच समिति ने बोकारो ट्रेजरी घोटाले की जांच पूरी कर ली है। समिति द्वारा विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने का कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के बाद इसे शीघ्र ही राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ट्रेजरी से फर्जी वेतन निकासी में शामिल कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
Bokaro Treasury Scam का प्रधान महालेखाकार की रिपोर्ट से हुआ था खुलासा
इस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ प्रधान महालेखाकार (अकाउंट्स) चंद्र मौली सिंह की सतर्कता से हुआ था। उन्होंने राज्य सरकार को औपचारिक पत्र भेजकर विभिन्न कोषागारों से वेतन मद में हुई संदिग्ध और फर्जी निकासी की जानकारी दी थी। महालेखाकार कार्यालय के इस खुलासे के बाद सरकार के होश उड़ गए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की तह तक जाने के लिए उच्च स्तरीय विशेष जांच समिति का गठन किया गया था। इस समिति की कमान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल को सौंपी गई थी। समिति को फर्जीवाड़े की पूरी कार्यप्रणाली और इसमें शामिल सिंडिकेट की पहचान करने का जिम्मा दिया गया था।
Bokaro Treasury Scam की जांच टीम में शामिल रहे वित्त विभाग के ये 7 सदस्य
आईएएस अमिताभ कौशल के नेतृत्व वाली इस उच्च स्तरीय समिति में कुल सात योग्य अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। इसमें महालेखाकार कार्यालय द्वारा नामित एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। इसके अलावा वित्त विभाग की ज्योति कुमारी झा, कपिल देव पंडित, नरेश झा, उमेश प्रसाद सिन्हा, गौरव कुमार और खिरोद सिंह मुंडा को टीम का हिस्सा बनाया गया। इस संयुक्त दल ने वित्तीय और प्रशासनिक दोनों ही स्तरों पर दस्तावेजों की गहन पड़ताल की। टीम ने प्रत्येक निकासी की बिलिंग और ऑनलाइन इंट्री का बारीकी से मिलान किया।
राज्य के सात जिलों के कोषागारों की जांच का सौंपा गया था जिम्मा
राज्य सरकार ने इस उच्च स्तरीय जांच समिति को प्रदेश के सात अलग-अलग कोषागारों से हुई अवैध निकासी की जांच का दायित्व सौंपा था। जांच के दायरे में बोकारो, हजारीबाग, रांची, रामगढ़, खूंटी, देवघर और पूर्वी सिंहभूम ट्रेजरी को शामिल किया गया था। इन सभी कोषागारों में फर्जी बिल और सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर अवैध निकासी के गंभीर आरोप लगे थे। समिति ने अपनी जांच प्रक्रिया के दौरान अब तक बोकारो और हजारीबाग का भौतिक दौरा किया। वहां के कोषागार कार्यालयों में कई दिनों तक कैंप कर जांच पड़ताल की गई।
बोकारो से जुटाए गए पुख्ता दस्तावेज, अधिकारियों से ली गई जानकारी
जांच दल ने बोकारो और हजारीबाग दौरे के दौरान वेतन मद से निकासी से संबंधित सभी आवश्यक फाइलों, पासबुक और डिजिटल दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया था। इसके अलावा ट्रेजरी के संबंधित अधिकारियों और तकनीकी सहायकों से निकासी की निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन के तरीकों की विस्तृत जानकारी ली गई थी। समिति ने पाया कि सिस्टम की खामियों और मिलीभगत के जरिए सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई थी। समिति ने अब बोकारो कोषागार से जुड़ी जांच का काम पूरी तरह संपन्न कर लिया है। अब सभी की निगाहें सरकार को सौंपी जाने वाली अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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