103 एकड़ वन भूमि पर कब्जे का खेल, फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से करोड़ों का वारा-न्यारा0
Tetulia Land Scam: रांची( के तेतुलिया जमीन घोटाले में खुलासे। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कई परतें खुली हैं। आईएएस राजेश्वरी बी के पति सूरज की भूमिका संदिग्ध मिली। मामले में शैलेश कुमार सिंह की सीधी संलिप्तता पाई गई। सूरज ने उसकी मुलाकात राजबीर कंस्ट्रक्शन से कराई थी। इसके बाद कंपनी ने जमीन सौदे में पैसा लगाया। 103 एकड़ वन भूमि पर कब्जे की साजिश थी। ईडी अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही।
Tetulia Land Scam: तीन पावर ऑफ अटॉर्नी से हड़पी जमीन
शैलेश कुमार सिंह केवल एक साधारण ब्रोकर नहीं था। वह हुसैन बंधुओं के साथ मिलकर खेल कर रहा था। अख्तर हुसैन और इजहार हुसैन से तीन मुख्तारनामे लिए। पहला पावर ऑफ अटॉर्नी 7 जून 2011 को हुआ। इसका नंबर 6341/843 था और इसमें 21 एकड़ थी। दूसरा पावर ऑफ अटॉर्नी 3 मई 2012 को बना। इसका नंबर 3938/197 था और इसमें 43 एकड़ थी। तीसरा पावर ऑफ अटॉर्नी 2 जुलाई 2012 को हुआ। इसका नंबर 4865/258 था और इसमें 22 एकड़ थी। कुल 86 एकड़ जमीन बेचने का अधिकार हासिल किया।
Tetulia Land Scam: म्यूटेशन से पहले ही बेच दी 64 एकड़ जमीन
जमीन का म्यूटेशन 29 जून 2012 को हुआ था। लेकिन शैलेश ने म्यूटेशन से पहले ही सौदे किए। उसने म्यूटेशन से पूर्व 64 एकड़ जमीन अपने नाम की। म्यूटेशन से पहले कुल 17 लोगों को जमीन बेची। शैलेश ने बेटे की कंपनी को 74 एकड़ बेची। कंपनी का नाम मैसर्स उमायुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड था। शिल्पी कुमारी सिंह को 10 एकड़ जमीन बेची गई। उन्होंने पांच-पांच एकड़ जमीन दो बार में खरीदी। दोनों बार 55.65 लाख रुपये कागजी मूल्य रहा। शिल्पी को 28 मार्च और 23 अप्रैल को रजिस्ट्री हुई।
राजबीर कंस्ट्रक्शन ने की स्टांप ड्यूटी की फंडिंग
सूरज की मध्यस्थता के बाद पैसों का लेन-देन हुआ। राजबीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक से मुलाकात कराई गई थी। इसके बाद कंपनी ने उमायुष मल्टीकॉम को पैसा दिया। इसी पैसे से 74 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री हुई। जमीन की स्टांप ड्यूटी और फीस भरी गई। वित्तीय कड़ियों की जांच में यह सच सामने आया। ईडी ने बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की जांच की। जांच में सूरज की भूमिका साफ तौर पर दिखी। केंद्रीय एजेंसी अब कंपनी के निदेशकों से पूछताछ करेगी। सभी संदिग्ध खातों की पड़ताल जारी है।
25 हजार में ली और 5 लाख प्रति डिसमिल में बेची
शैलेश ने इजहार हुसैन से 25 हजार डिसमिल तय किया। दावे पर 6500 रुपये कम करने की शर्त थी। शैलेश ने हुसैन बंधुओं को कुल 1.75 करोड़ दिए। इसके बाद उसने 5 लाख डिसमिल से अधिक में बेची। हालांकि कागजों में बहुत कम कीमत दिखाई गई। भारी मात्रा में काली कमाई का खेल हुआ। बाधु राम को 1.41 लाख में 6 डिसमिल जमीन मिली। पूजा देवी ने एक लाख में 4 डिसमिल जमीन ली। चंदन तिवारी को 12 फरवरी 2015 को 4 डिसमिल मिली। पूनम सिंह ने 1.87 लाख में 8 डिसमिल खरीदी। ममता मरांडी को 1.43 लाख में 6 डिसमिल बेची।
वन भूमि पर फर्जी दस्तावेजों का बड़ा सिंडिकेट
तेतुलिया मौजा की यह जमीन वन भूमि बताई गई। फर्जी हुकूमनामा और कागजात के सहारे फर्जीवाड़ा रचा गया। भू-माफिया और सफेदपोशों का गठजोड़ सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर दाखिल-खारिज कराया गया। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। जमीन घोटाले में शामिल अन्य लोगों पर शिकंजा कसेगा। ईडी जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई करेगी। पूरे सिंडिकेट की बेनामी संपत्तियों की पहचान हो रही। दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जाएगा।
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