Ranchi News: हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी; सीआई और बड़ा बाबू जा चुके हैं जेल, दस्तावेजों के गायब होने पर संशय कायम
Ranchi News: रांची। राजधानी रांची के नामकुम अंचल में हुए करोड़ों रुपये के चर्चित जमीन घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी एसीबी तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) श्वेता वर्मा को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा वर्तमान में कहां हैं और उनकी लोकेशन क्या है, इसे लेकर एसीबी की टीमों को अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है।
हालांकि, इस बहुचर्चित भूमि घोटाले में एसीबी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (CI) मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन बड़ा बाबू दीपक कुमार को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। ऐसे में दो प्रमुख आरोपियों की सलाखों के पीछे पहुंचने के बावजूद तत्कालीन सीओ की गिरफ्तारी न हो पाना प्रशासनिक व जांच तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
Ranchi News: 4 मई से कार्यालय नहीं आ रही हैं श्वेता वर्मा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा गत 4 मई 2026 से लगातार अपने कार्यालय से अनुपस्थित चल रही हैं। नामकुम अंचल के बाद उन्हें रांची स्थित भविष्य निधि (Provident Fund) कार्यालय में उप निदेशक (Deputy Director) के पद पर तैनात किया गया था।
इसके बाद राज्य सरकार द्वारा उनका तबादला राजस्व विभाग में एडीएम (ADM) रैंक के पद पर किया गया था, लेकिन उन्होंने नए पद पर अपना पदभार ग्रहण नहीं किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही वे लगातार फरार बताई जा रही हैं।
जेल में बंद दो आरोपियों से पूछताछ, दस्तावेज गायब होने पर नहीं मिला स्पष्ट जवाब
मामले की जांच कर रही एसीबी की टीम ने जेल में बंद तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन बड़ा बाबू दीपक कुमार को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान जब उनसे अंचल कार्यालय से जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों और पंजियों के गायब होने को लेकर सवाल किए गए, तो दोनों ने गोलमोल जवाब दिए।
दोनों आरोपियों ने दावा किया कि संबंधित सभी दस्तावेज तत्कालीन राजस्व कर्मचारी महली के पास थे, जिनकी पूर्व में मौत हो चुकी है। हालांकि, आरोपी यह स्पष्ट करने में पूरी तरह असमर्थ रहे कि दस्तावेज किस तिथि को और किस प्रक्रिया के तहत मृतक कर्मचारी को सौंपे गए थे। एसीबी अधिकारी आरोपियों द्वारा दिए गए इन जवाबों से पूरी तरह असंतुष्ट हैं और मामले में साक्ष्यों को मिटाने की साजिश की भी जांच कर रहे हैं।
1.22 एकड़ कीमती जमीन की निजी कंपनी के नाम गैरकानूनी जमाबंदी का आरोप
यह पूरा मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 की कुल 1.22 एकड़ कीमती जमीन के फर्जीवाड़े से जुड़ा है। दर्ज शिकायत के मुताबिक, मूल रैयत की माता ने वर्ष 1978-79 में तीन पंजीकृत सेल डीड (Kewala) के माध्यम से कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी। बाद में हुए पारिवारिक बंटवारे के तहत शिकायतकर्ता जमीन का वैध उत्तराधिकारी बना।
आरोप है कि नामकुम अंचल कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ कर सरकारी अभिलेखों और पंजियों में व्यापक हेरफेर किया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ‘प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड’ नामक निजी कंपनी के नाम करीब 1.22 एकड़ जमीन की अवैध जमाबंदी (Mutation) कायम कर दी। इसके साथ ही करीब दो एकड़ अतिरिक्त जमीन का भी फर्जी म्यूटेशन कर रसीद (Demand) काटने का गंभीर आरोप है। यह पूरा मामला 17 अगस्त 2016 को दोहरी जमाबंदी से संबंधित नोटिस जारी होने के बाद उजागर हुआ था।
झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) के कड़े रुख और निर्देशों के बाद एसीबी ने 26 अगस्त 2026 को कांड संख्या 18/2026 दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी। इसके बाद 22 सितंबर 2026 को तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और बड़ा बाबू दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। परंतु, मुख्य आरोपी मानी जा रही तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा 3 माह बीत जाने के बाद भी एसीबी की पकड़ से दूर हैं।


