सांसद निशिकांत दुबे की जनहित याचिका निष्पादित, 13 मई 2027 को पेश करनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
Ranchi News: देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जरूरी निर्देश दिए हैं। सांसद निशिकांत दुबे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार से छह महीने के भीतर विभिन्न सुविधाओं से जुड़े निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही इन सुविधाओं की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिका निष्पादित कर दी। मामले में अगली सुनवाई की तारीख 13 मई 2027 निर्धारित की गई है।
Ranchi News: चीफ जस्टिस एमएस सोनक की खंडपीठ में हुई सुनवाई
इस जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देवघर एम्स में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और उनके क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा।
अदालत ने सरकार को छह महीने के भीतर संबंधित सुविधाओं के संबंध में आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही प्रत्येक बिंदु पर प्रगति और मौजूदा स्थिति की जानकारी देने को कहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में सरकार को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति का मामला भी उठा
याचिकाकर्ता सांसद निशिकांत दुबे की ओर से देवघर एम्स में निर्बाध बिजली आपूर्ति का मुद्दा उठाया गया। अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था के लिए लगातार बिजली उपलब्ध होना जरूरी है। इसके अलावा एम्स में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
याचिका में पुनासी डैम से देवघर एम्स तक लगातार पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया गया है। इसका उद्देश्य अस्पताल में मरीजों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
फायर फाइटिंग व्यवस्था और कर्मचारियों के बच्चों के स्कूल की मांग
जनहित याचिका में देवघर एम्स की अग्निशमन व्यवस्था यानी फायर फाइटिंग सुविधा का मुद्दा भी उठाया गया। अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते हैं। ऐसे में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
इसके अलावा एम्स में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा का मुद्दा भी अदालत के समक्ष रखा गया। याचिका में कर्मचारियों के बच्चों के लिए केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने की मांग की गई है। इसके लिए झारखंड सरकार से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
एम्स की जमीन से अतिक्रमण हटाने और रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग
याचिका में देवघर एम्स को आवंटित जमीन से अतिक्रमण हटाने का मुद्दा भी शामिल है। प्रार्थी की ओर से मांग की गई है कि एम्स के लिए निर्धारित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि संस्थान के विकास और विस्तार में किसी तरह की बाधा नहीं आए।
इसके साथ ही देवघर एम्स तक आवागमन को सुगम बनाने के लिए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण की मांग भी की गई है। इन सुविधाओं को संस्थान के समग्र विकास और बेहतर संचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया है।
13 मई 2027 को सरकार को देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान सांसद निशिकांत दुबे की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने पक्ष रखा। अदालत ने मामले में उठाए गए विभिन्न बिंदुओं पर राज्य सरकार से छह महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
हाईकोर्ट ने याचिका को निष्पादित करते हुए अगली सुनवाई के लिए 13 मई 2027 की तारीख निर्धारित की है। अब राज्य सरकार को अदालत के निर्देशों के अनुरूप देवघर एम्स में सुविधाओं की स्थिति और उन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत करना होगा।
इस मामले में अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। इसमें यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिजली, पानी, अग्निशमन, स्कूल के लिए जमीन, अतिक्रमण हटाने और रेलवे ओवरब्रिज जैसी मांगों पर सरकार ने कितनी प्रगति की है।
read also:Giridih Bank Robbery: धनवार यूको बैंक में दिनदहाड़े 4 करोड़ के सोने व 12 लाख की डकैती


