- मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर फिर उठे सवाल
Jharkhand: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में आ गई है। पेपर लीक, फर्जी नेटवर्क, कोचिंग माफिया और करोड़ों रुपये के अवैध सौदों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले ने मेहनत करने वाले लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
“मेरिट” की जगह पैसों का खेल?
जांच एजेंसियों की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ संगठित गिरोह छात्रों को “गारंटीड मेडिकल सीट” दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूल रहे थे। आरोप है कि परीक्षा से पहले कथित “गेस पेपर” और महत्वपूर्ण प्रश्नों का नेटवर्क के जरिए वितरण किया गया। कई जगहों पर 20 से 30 लाख रुपये तक की डील की बात सामने आई है।
कोचिंग माफिया और बिचौलियों का नेटवर्क
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ कोचिंग नेटवर्क और बिचौलिये छात्रों एवं अभिभावकों को मेडिकल सीट दिलाने का लालच देकर फंसा रहे थे। सोशल मीडिया, निजी ग्रुप और कथित “स्पेशल बैच” के माध्यम से छात्रों को भरोसा दिलाया जा रहा था कि परीक्षा में आने वाले प्रश्न पहले से उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
कई राज्यों तक फैला जांच का दायरा
राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और बिहार समेत कई राज्यों में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और कुछ मामलों में डॉक्टरों व एजेंटों की संलिप्तता की भी बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र या कथित गेस पेपर छात्रों तक कैसे पहुंचाए गए।
छात्रों में भारी नाराजगी
पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबरों के बाद छात्रों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। कुछ छात्रों ने इसे “मेहनती छात्रों के साथ अन्याय” बताया।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और धांधली जारी रही, तो इसका सीधा असर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा। अयोग्य उम्मीदवार यदि गलत तरीके से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाएंगे, तो भविष्य में मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग तेज
NEET विवाद के बाद अब परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञ कंप्यूटर आधारित परीक्षा, डिजिटल सिक्योरिटी और पारदर्शी मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की बात कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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