JNU विवाद पर रांची में सियासी हलचल, कांग्रेस कार्यालय के घेराव को लेकर पुलिस अलर्ट
JNU Protest: रांची में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर और मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। बीजेपी महिला मोर्चा ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने जिला स्कूल से आक्रोश मार्च निकाला। इसके बाद कांग्रेस कार्यालय के घेराव की तैयारी की गई। महिला मोर्चा ने मामले में कांग्रेस नेतृत्व की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा। कांग्रेस कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। बैरिकेडिंग की गई और पुलिस बल की तैनाती की गई।
JNU Protest: 11 छात्राओं की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय ने की कार्रवाई
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 11 छात्राओं ने विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इन शिकायतों की जांच की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।

विश्वविद्यालय के आदेश के मुताबिक, आंतरिक समिति ने जांच के बाद उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके आधार पर सेवा नियमों के तहत बर्खास्तगी का निर्णय लिया गया। आदेश पर जेएनयू की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के हस्ताक्षर बताए गए हैं। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर की गई। हालांकि, इस मामले में आरोपों, जांच के निष्कर्षों और संबंधित पक्षों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
बीजेपी महिला मोर्चा ने कांग्रेस नेतृत्व पर उठाए सवाल
इस मामले को लेकर बीजेपी महिला मोर्चा ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोला। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि महिला सुरक्षा और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर विषयों पर राजनीतिक दलों को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए। महिला मोर्चा की मांग है कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करे।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों से जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए राजनीतिक आरोप बीजेपी महिला मोर्चा के बयान हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस कार्यालय के आसपास सुरक्षा के इंतजाम
प्रदर्शन और घेराव की आशंका को देखते हुए रांची में पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया। कांग्रेस कार्यालय के आसपास बैरिकेडिंग की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को तैयार रखा गया। प्रशासन का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
राजनीतिक दलों के कार्यालयों के बाहर होने वाले प्रदर्शनों में भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित करना पुलिस के लिए अहम होता है। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों के साथ प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। इस मामले में भी पुलिस की तैयारी को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
जेएनयू की कार्रवाई के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
अंगोमचा बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। राजनीति के साथ उनका जुड़ाव अकादमिक क्षेत्र से भी रहा है। वह जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के अंतर्गत सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर थे।
विश्वविद्यालय की कार्रवाई के बाद यह मामला कैंपस तक सीमित नहीं रहा। बीजेपी और उससे जुड़े छात्र संगठन पहले भी शिकायतों की जांच तथा जवाबदेही की मांग उठा चुके हैं। अब बीजेपी महिला मोर्चा ने इसे कांग्रेस नेतृत्व की जिम्मेदारी से जोड़ते हुए प्रदर्शन किया है।
दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अकोइजम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी पर भी सवाल उठाए हैं और इसे राजनीतिक साजिश बताया है। ऐसे में मामले के सभी पक्षों को सामने रखना जरूरी है। विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई अपनी जगह है, जबकि आरोपों से संबंधित अन्य कानूनी पहलुओं को उसी आधार पर समझा जाना चाहिए, जिस पर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध हो।
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जारी रहेगी राजनीतिक बहस
जेएनयू का यह मामला अब शिक्षा संस्थानों में शिकायतों की जांच, महिलाओं की सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही जैसे सवालों से जुड़ गया है। बीजेपी महिला मोर्चा कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांग रहा है। वहीं, इस पूरे विवाद में निष्पक्ष जांच, संस्थागत प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं।
महिला सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर राजनीतिक बयानबाजी से अलग तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड को प्राथमिकता देना जरूरी है। विश्वविद्यालय की जांच और बर्खास्तगी के आदेश से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोपों और राजनीतिक मांगों को संबंधित संगठन के बयानों के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। मामले में आगे की किसी भी कार्रवाई या प्रतिक्रिया के लिए आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना उचित होगा।
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