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Jharkhand Ambulance Strike: बेनतीजा रही वार्ता, हड़ताल जारी रखने का एलान

17 अक्टूबर तक बकाया भुगतान और 20 कर्मियों की बहाली पर सहमति, संघ अड़ा

Jharkhand Ambulance Strike: 108 एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल जारी रहेगी। पहले दौर की बातचीत पूरी तरह सफल नहीं रही। सहमति बनने के बाद भी गतिरोध बना रहा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी वार्ता के लिए पहुंचे। स्वास्थ्य सचिव भी कर्मचारियों से बातचीत में शामिल रहे। 17 अक्टूबर तक बकाया भुगतान करने पर सहमति बनी। हटाए गए 20 कर्मचारियों की बहाली का निर्देश हुआ। इसके बावजूद कर्मचारी आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं।

Jharkhand Ambulance Strike: केवल एक मांग पूरी हुई, संघ ने दिया बयान

कर्मचारी संघ अध्यक्ष नीरज तिवारी ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, हमारी कई प्रमुख मांगें अधूरी रह गईं। सरकार ने केवल एक मांग पर अपनी सहमति दी। पहले भी बकाये भुगतान के कई आश्वासन मिले। लेकिन समय पर कर्मियों को वेतन नहीं मिल पाता। कर्मचारियों में व्यवस्था को लेकर भारी असंतोष है। जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल चलेगी। कर्मचारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं।

Jharkhand Ambulance Strike: त्योहार बाद एजेंसी बदलने का मंत्री ने दिया भरोसा

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कर्मचारियों की बातें सुनीं। उन्होंने कहा, त्योहार में हमारी पूरी सहानुभूति आपके साथ है। एनएचएम के 13653 कर्मियों ने कभी हड़ताल नहीं की। सरकार ने उन्हें स्वास्थ्य बीमा का बड़ा लाभ दिया। कर्मचारियों की मांग पर मौजूदा एजेंसी को हटाया जाएगा। दुर्गापूजा के बाद नई कंपनी लाने की प्रक्रिया शुरू होगी। 20 बर्खास्त कर्मियों को तुरंत वापस काम पर लेंगे। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में जुटी है।

सिविल सर्जन के अधीन करने की मांग हुई खारिज

कर्मचारी सेवा को सिविल सर्जन के अधीन चाहते हैं। वे विभागीय स्तर पर सीधी बहाली चाहते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने यह मांग मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, यह व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है। एंबुलेंस संचालन एजेंसी के माध्यम से ही किया जाएगा। इस नीतिगत मुद्दे पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनी। यही बिंदु हड़ताल जारी रहने की मुख्य वजह बना। कर्मचारी सीधे सरकारी नियंत्रण की जिद पर अड़े हैं।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडरा रहा बड़ा संकट

हड़ताल जारी रहने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पा रही। गर्भवती महिलाओं और घायलों को अस्पताल ले जाना कठिन हुआ। ग्रामीण इलाकों में 108 सेवा पूरी तरह ठप पड़ी है। निजी एंबुलेंस वाले मनमाना किराया वसूल रहे हैं। गरीब परिवारों के सामने जीवन-मरण का सवाल खड़ा हो गया। स्वास्थ्य विभाग वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन हालात अब भी काफी चिंताजनक बने हुए हैं।

17 अक्टूबर के भुगतान पर टिकी हैं सबकी निगाहें

विभाग ने 17 अक्टूबर तक भुगतान का वादा किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे खातों में राशि देखेंगे। वादों पर भरोसा करने का समय अब बीत चुका है। कर्मचारी एनआरएचएम कार्यालय के बाहर डटे हुए हैं। वे चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन को आगे बढ़ाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी संकट टालने के रास्ते तलाश रहे। अब देखना होगा कि गतिरोध कैसे समाप्त होता है। त्योहार के समय आम जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए।

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