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Dundigal Air Force: एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की अंतिम उड़ान, पूरा हुआ सफर

42 साल पुराने गुरु वीएस कोचर संग भरी उड़ान, 1984 में इसी किरण विमान से सीखा था उड़ना

Dundigal Air Force: वायुसेना में आज भावुक करने वाला क्षण दिखा। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अंतिम उड़ान भरी। डुंडीगल स्थित एयरफोर्स एकेडमी में यह यह ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। वे अपने पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के साथ उड़े। 73 वर्षीय रिटायर्ड विंग कमांडर वीएस कोचर कॉकपिट में थे। दोनों ने ऐतिहासिक किरण ट्रेनर विमान से उड़ान भरी। टेल नंबर यू 707 वाले विमान ने उड़ान भरी। पूरे 55 मिनट तक यह ऐतिहासिक उड़ान चली। इसके साथ ही वायुसेना प्रमुख का सफर पूरा हुआ।

Dundigal Air Force: 28 जनवरी 1984 को शुरू हुआ था यह सफर

वायुसेना प्रमुख ने 42 साल पुरानी यादें ताजा कीं। उन्होंने 28 जनवरी 1984 को पहली उड़ान भरी थी। इसी डुंडीगल एयरबेस पर पहली बार विमान उड़ाया था। तब विंग कमांडर वीएस कोचर ने उन्हें सिखाया था। उस समय भी किरण विमान से ही शुरुआत हुई थी। वर्दी में अंतिम उड़ान भी उसी विमान से भरी। दोनों ने ठीक उसी जगह से उड़ान भरी। वायुसेना प्रमुख ने इसे सपना सच होना बताया। उन्होंने अपने गुरु के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।

Dundigal Air Force: अनोखा संयोग, बेसिक विमान अब भी दे रहा सेवा

एपी सिंह ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, मैं संभवतः अकेला वायुसेना प्रमुख हूं। जिस बेसिक विमान से मैंने शुरुआत की थी। वह बेसिक विमान आज भी सेवा में तैनात है। मैं अपने करियर का चक्र पूरा करना चाहता था। जहां से सफर शुरू हुआ, वहीं खत्म हुआ। अपने पहले शिक्षक के साथ उड़ना गौरव की बात है। उन्होंने मुझे आसमान में उड़ना सिखाया था। यह उड़ान मेरे जीवन की सबसे यादगार उड़ान है।

सबसे होनहार छात्र रहे हैं एपी सिंह: वीएस कोचर

रिटायर्ड विंग कमांडर वीएस कोचर भी बेहद भावुक दिखे। 73 साल की उम्र में उन्होंने कॉकपिट संभाला। उन्होंने कहा, एपी सिंह मेरे सबसे होनहार शिष्य थे। उनके साथ दोबारा उड़ने का मेरा सपना पूरा हुआ। इस उम्र में उनके साथ उड़ान भरना बहुत खास है। वे दुनिया के सबसे बेहतरीन इंसान हैं। गुरु और शिष्य की इस जोड़ी ने इतिहास रचा। दोनों ने उड़ान के बाद एक-दूसरे को गले लगाया। उपस्थित वायुसेना अधिकारियों ने तालियों से स्वागत किया।

55 मिनट की उड़ान से पूरा हुआ 42 साल का चक्र

यह ऐतिहासिक उड़ान 55 मिनट तक आसमान में रही। किरण ट्रेनर विमान ने आसमान में कई करतब दिखाए। डुंडीगल का आकाश इस अनोखे मिलन का गवाह बना। सेवा विस्तार और विदाई से पहले यह विशेष मौका आया। विमान के सुरक्षित उतरते ही वाटर कैनन सैल्यूट मिला। एकेडमी के युवा कैडेट्स ने इस पल को देखा। युवा पायलटों के लिए यह बहुत प्रेरणादायक पल था। भारतीय वायुसेना के गौरवशाली इतिहास में यह अध्याय जुड़ा।

स्वदेशी किरण विमान का लंबा और स्वर्णिम इतिहास

एचएएल द्वारा निर्मित किरण विमान दशकों से सेवा में है। एचजेटी-16 किरण विमान ने हजारों पायलट तैयार किए। लड़ाकू विमान उड़ाने से पहले इसी पर ट्रेनिंग मिलती है। तीन पीढ़ियों के पायलटों ने इस पर हाथ आजमाया। सेवानिवृत्ति से पहले एयर चीफ को यह सम्मान मिला। वायुसेना की परंपरा और अनुशासन की अनूठी मिसाल दिखी। गुरु-शिष्य की इस परंपरा ने सबका दिल जीत लिया। रक्षा गलियारों में इस उड़ान की जमकर चर्चा हो रही।

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