मांगों को लेकर आंदोलन तेज, 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन का ऐलान
Doctors Protest: पूर्वी सिंहभूम में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की लंबित मांगों को लेकर चिकित्सा संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की जमशेदपुर शाखा समेत विभिन्न संगठनों ने सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अगले दिन, यानी 22 अक्टूबर को पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन के पहले चरण में 13 से 20 अक्टूबर तक डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी काली पट्टी पहनकर विरोध जता रहे हैं।
Doctors Protest: जिला मुख्यालय में सौंपा गया ज्ञापन
14 अक्टूबर को पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय में विभिन्न चिकित्सा संगठनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान डॉक्टरों की समस्याओं और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया गया। संगठनों ने जिला प्रशासन को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर उचित कार्रवाई की मांग की।
चिकित्सा संगठनों का कहना है कि डॉक्टरों की समस्याओं का लंबे समय तक लंबित रहना स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी चिंता का विषय है। इसलिए सरकार और प्रशासन को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। संगठनों ने जिला स्तर पर समाधान योग्य मामलों में तत्काल कार्रवाई करने और नीतिगत मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया है।
Doctors Protest:सरकारी डॉक्टरों की पदोन्नति और वेतन संबंधी मांगें
चिकित्सा संगठनों ने सरकारी डॉक्टरों की सेवा शर्तों में सुधार की मांग की है। इसमें समय पर पदोन्नति, करियर में आगे बढ़ने के अवसर और लंबित वेतन का भुगतान शामिल है। संविदा पर काम कर रहे चिकित्सकों की समस्याओं के समाधान पर भी जोर दिया गया है।
संगठनों ने कहा कि डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण मिलना चाहिए। सेवा संबंधी नियम स्पष्ट होने चाहिए। पदोन्नति और अन्य लाभों के लिए पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है। इससे चिकित्सकों को पेशेवर स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। साथ ही, स्वास्थ्य संस्थानों में कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
आयुष्मान योजना के भुगतान में देरी का मुद्दा उठा
ज्ञापन में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के लंबित भुगतान का मुद्दा भी शामिल है। चिकित्सा संगठनों ने अस्पतालों के बकाया दावों का जल्द निपटारा करने की मांग की है।
उनका कहना है कि योजना के पैकेज की दरों से जुड़ी विसंगतियों को दूर किया जाना चाहिए। अस्पतालों को भुगतान के लिए स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि अस्पतालों को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
अस्पतालों के भुगतान में देरी का असर उनके नियमित संचालन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में संगठनों ने संबंधित अधिकारियों से इस विषय पर ठोस पहल करने का आग्रह किया है।
जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की समस्याएं भी शामिल
चिकित्सा संगठनों ने जूनियर डॉक्टरों की नियुक्ति, संविदा सेवा और प्रशिक्षण से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया है। मेडिकल छात्रों को समय पर स्टाइपेंड देने की मांग की गई है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
संगठनों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलना चाहिए। क्लिनिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
डेंटल डॉक्टरों के करियर से जुड़े मुद्दे भी ज्ञापन में शामिल हैं। संगठनों ने केंद्र सरकार और बिहार के मॉडल की तर्ज पर डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) लागू करने की मांग की है। इसके लिए जरूरी नियम बनाने और स्वीकृत पदों पर पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां करने का आग्रह किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के पात्र चिकित्सकों के मामलों पर लागू नियमों के अनुसार विचार करने की मांग भी उठाई गई है।
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए नियमित संवाद की मांग
चिकित्सा संगठनों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ नियमित संवाद स्थापित करने की जरूरत बताई है। इसके लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, आईएमए और अन्य मान्यता प्राप्त चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है।
संगठनों के अनुसार, नियमित बैठकों और समीक्षा से समस्याओं की पहचान करना आसान होगा। इससे लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की निगरानी भी की जा सकेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान निकालने में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
21 अक्टूबर को प्रदर्शन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
चिकित्सा संगठनों ने आंदोलन का कार्यक्रम स्पष्ट कर दिया है। 13 से 20 अक्टूबर तक काली पट्टी पहनकर विरोध दर्ज कराया जा रहा है। इसके बाद 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन प्रस्तावित है। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 22 अक्टूबर को पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।
फिलहाल संगठनों ने सरकार और प्रशासन से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की उम्मीद जताई है। जिला प्रशासन से स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करने और राज्य स्तर के मामलों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का अनुरोध किया गया है। अब आंदोलन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सरकार की पहल महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, मरीजों को होने वाली संभावित परेशानी से बचाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।


