ट्रेजरी में तकनीकी अड़चन से भुगतान लंबित, 32 कार्य प्रमंडलों से जारी हुए थे 219.17 करोड़ रुपये के बिल
Ranchi News: झारखंड में पेयजल स्वच्छता विभाग के अधीन संचालित केंद्र प्रायोजित योजनाओं के 65.71 करोड़ रुपये का भुगतान ट्रेजरी में लंबित है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, भुगतान में देरी की वजह तकनीकी समस्या बताई जा रही है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति से जुड़ी योजनाओं के लिए जारी किए गए बिलों से संबंधित है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन योजनाओं के लिए एसएनए-स्पर्श (SNA-SPARSH) प्रणाली के तहत कुल 223.22 करोड़ रुपये का आवंटन उपलब्ध है। इसके मुकाबले विभाग के 32 कार्य प्रमंडलों ने 219.17 करोड़ रुपये के बिल तैयार किए थे। इनमें से 153.46 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
Ranchi News: आवंटन के मुकाबले 65.71 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी
पेयजल स्वच्छता विभाग की केंद्र प्रायोजित योजनाओं के भुगतान की स्थिति पर गौर करें, तो कुल आवंटन और तैयार किए गए बिलों के बीच का अंतर भी सामने आता है। योजनाओं के लिए 223.22 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। वहीं, 32 कार्य प्रमंडलों की ओर से 219.17 करोड़ रुपये के बिल जेनरेट किए गए हैं। इनमें से 153.46 करोड़ रुपये का भुगतान पूरा हो चुका है।
शेष राशि में से 4.05 करोड़ रुपये के बिल प्रमंडल स्तर पर लंबित हैं। दूसरी ओर, 65.71 करोड़ रुपये के भुगतान की प्रक्रिया ट्रेजरी में अटकी हुई है। विभागीय जानकारी में इसका कारण तकनीकी समस्या बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तकनीकी बाधा किस स्तर पर आ रही है और इसे दूर करने में कितना समय लगेगा।
Ranchi News:एसएनए-स्पर्श प्रणाली से होता है भुगतान
केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए एसएनए-स्पर्श एकीकृत वित्तीय व्यवस्था के तहत भुगतान किया जाता है। इस प्रणाली का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय प्रणालियों को जोड़कर योजनाओं की राशि का समय पर हस्तांतरण सुनिश्चित करना है। इसमें सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS), राज्य की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय किया जाता है।
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, एसएनए-स्पर्श व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत के अनुसार राशि जारी करना और सरकारी धन के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। इस व्यवस्था में भुगतान की प्रक्रिया संबंधित वित्तीय प्रणालियों के माध्यम से आगे बढ़ती है। ऐसे में तकनीकी स्तर पर आने वाली बाधा भुगतान की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, झारखंड में पेयजल योजनाओं से जुड़े लंबित भुगतान के मामले में समस्या की सटीक वजह की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
SVS योजना में एक गांव की जरूरत पर जोर
लंबित भुगतान का मामला मुख्य रूप से एसवीएस (SVS) और क्लस्टर योजनाओं से जुड़ा है। एसवीएस योजना के तहत एक गांव की घरेलू पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यवस्था की जाती है। इसका उद्देश्य संबंधित गांव के घरों तक पेयजल पहुंचाना है। इस तरह की योजना में गांव की जरूरत के अनुसार पेयजलापूर्ति की व्यवस्था तैयार की जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ऐसी योजनाओं की अहम भूमिका होती है। इनके तहत बुनियादी ढांचे के निर्माण, पाइपलाइन और जलापूर्ति से जुड़े कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि, किसी विशेष गांव में योजना की वर्तमान स्थिति, लाभार्थियों की संख्या और निर्माण कार्य की प्रगति के बारे में उपलब्ध जानकारी में अलग से विवरण नहीं दिया गया है।
क्लस्टर योजना से कई गांवों को मिलता है पानी
क्लस्टर योजना की व्यवस्था एसवीएस योजना से अलग है। इसमें कई गांवों को ध्यान में रखकर एक साझा पेयजलापूर्ति योजना तैयार की जाती है। इस योजना के माध्यम से उससे जुड़े सभी गांवों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। इससे एक ही योजना के जरिए कई गांवों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जाता है।
ऐसी योजनाओं में निर्माण कार्य और भुगतान की प्रक्रिया का सुचारू रहना जरूरी है। बिलों का भुगतान लंबित रहने पर संबंधित कार्यों के वित्तीय प्रबंधन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि ट्रेजरी में भुगतान अटकने से किसी खास योजना का काम रुक गया है। इसके लिए संबंधित योजनाओं की कार्य प्रगति और भुगतान की अद्यतन स्थिति की जानकारी जरूरी होगी।
भुगतान की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार
पेयजल स्वच्छता विभाग की योजनाओं से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि उपलब्ध 223.22 करोड़ रुपये के आवंटन में से 219.17 करोड़ रुपये के बिल तैयार किए जा चुके हैं। इनमें 153.46 करोड़ रुपये का भुगतान हो गया है, जबकि 65.71 करोड़ रुपये ट्रेजरी में लंबित हैं। इसके अतिरिक्त, 4.05 करोड़ रुपये के बिल कार्य प्रमंडलों के स्तर पर लंबित बताए गए हैं।
अब तकनीकी समस्या के समाधान और लंबित भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने पर नजर रहेगी। इससे संबंधित योजनाओं के वित्तीय कामकाज की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि, भुगतान जारी करने की संभावित तारीख, तकनीकी समस्या के समाधान की समयसीमा और लंबित राशि से प्रभावित कार्यों की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इन बिंदुओं पर विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
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