Ranchi News: बोकारो डीसी ने हाईकोर्ट में दी अंडरटेकिंग, प्लांट के सभी 11 गेट खुले और स्थिति पूरी तरह सामान्य; याचिका निष्पादित
Ranchi News: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में नियोजन की मांग को लेकर पिछले दिनों विस्थापितों के उग्र आंदोलन और 15 हजार से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों के प्लांट के भीतर फंसे रहने से उत्पन्न हुए संकट के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बोकारो जिला प्रशासन को भविष्य के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि भविष्य में बीएसएल प्लांट परिसर या आसपास शांति व्यवस्था बिगड़ने की रत्ती भर भी आशंका दिखाई दे, तो बोकारो जिला प्रशासन बिना किसी देरी के तुरंत कड़ा एक्शन ले और स्थिति बिगड़ने का कतई इंतजार न करे।
Ranchi News: बोकारो डीसी ने कोर्ट में दाखिल की अंडरटेकिंग, सभी 11 गेट खुले
सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त (DC) की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में औपचारिक अंडरटेकिंग दाखिल की गई। जिला प्रशासन ने अदालत को अवगत कराया कि बोकारो स्टील प्लांट के सभी 11 मुख्य प्रवेश द्वारों (Gates) को पूरी तरह खोल दिया गया है। कर्मचारियों और अधिकारियों की आवाजाही अब पूरी तरह सुचारु और सामान्य हो चुकी है तथा पूरे प्लांट परिसर में शांति व्यवस्था बहाल है।
दूसरी तरफ, प्रार्थी की ओर से भी पीठ को सूचित किया गया कि प्लांट में अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है और कामकाज पटरी पर लौट आया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और बोकारो प्रशासन के आश्वासन के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने संबंधित रिट याचिका को निष्पादित (Dispose of) कर दिया। हालांकि, अदालत ने हिदायत दी कि जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार कड़ी नजर बनाए रखे ताकि किसी भी सूरत में राष्ट्रीय संपत्ति और प्लांट को नुकसान न पहुंचे।
9 दिनों तक ठप रहा था उत्पादन, 15 हजार कर्मचारी प्लांट में ही फंस गए थे
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व की सुनवाई में प्रार्थी की ओर से हाईकोर्ट को अवगत कराया गया था कि नियोजन (Employment) की मांग को लेकर विस्थापितों ने लगभग 9 दिनों तक अभूतपूर्व आंदोलन चलाया था। आंदोलनकारियों ने बीएसएल प्लांट के सभी प्रवेश द्वारों पर अनिश्चितकालीन जाम लगा दिया था, जिससे प्लांट के अंदर और बाहर जाने का संपर्क पूरी तरह कट गया था। इस दौरान अपनी नियमित पाली (Shift) में ड्यूटी करने गए करीब 15 हजार अधिकारी और कर्मचारी प्लांट के अंदर ही कैद होकर रह गए थे, जबकि दूसरी शिफ्ट के कर्मचारी अंदर प्रवेश नहीं कर सके थे।
आंदोलन के कारण बीएसएल (Bokaro Steel Plant) की अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील इकाइयों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया था। ब्लास्ट फर्नेस (Blast Furnace), सिंटर प्लांट और स्टील मेल्टिंग शॉप (SMS) जैसे मुख्य उत्पादन केंद्रों में कामकाज रुकने से प्रबंधन को न केवल भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था, बल्कि तकनीकी नुकसान का खतरा भी पैदा हो गया था। 18 अक्टूबर को हुई पिछली सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने बोकारो जिला प्रशासन को कर्मचारियों की आवाजाही सुरक्षित करने और कड़े कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त आदेश दिए थे।


