ढाक की थाप पर थिरके श्रद्धालु, पारंपरिक परिधान में जुगसलाई का किया भ्रमण
Jugsalai Durga Bari: महालया पर जमशेदपुर भक्तिमय हो उठा। जुगसलाई दुर्गा बाड़ी ट्रस्ट ने भव्य शोभायात्रा निकाली। मां दुर्गा के आगमन का उत्साह देखने को मिला। महिला, पुरुष और युवा पारंपरिक परिधान में सजे थे। चंडी पाठ के श्लोकों से पूरा इलाका गूंज उठा। ढाक की थाप ने उत्सव का माहौल बना दिया। शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके साथ ही दुर्गा पूजा का विधिवत आगाज हो गया। चारों तरफ भक्ति और उल्लास छाया रहा।
Jugsalai Durga Bari: ढाक और शंख की ध्वनि से भक्तिमय हुआ वातावरण
शोभायात्रा दुर्गा बाड़ी परिसर से शुरू हुई। श्रद्धालुओं ने पूरे जुगसलाई क्षेत्र का भ्रमण किया। पारंपरिक लाल-सफेद साड़ियों में महिलाएं शामिल हुईं। पुरुष पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर कतारबद्ध चले। ढाकियों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। शंख और घंटियों की गूंज से माहौल आध्यात्मिक हुआ। रास्ते भर लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। जगह-जगह मां दुर्गा की आरती उतारी गई। पूरा वातावरण मां के जयकारों से गुंजायमान रहा। लोगों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का अभिनंदन किया।
Jugsalai Durga Bari: सुख और समृद्धि की कामना: शंभू नाथ बोस
ट्रस्ट के ट्रस्टी शंभू नाथ बोस ने विचार रखे। महालया पर मां दुर्गा का धरा पर आगमन होता। देवी पक्ष की शुरुआत इसी दिन से मानी जाती है। शक्ति स्वरूपा मां की आराधना से संकट दूर होते हैं। सभी श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। सगे-संबंधियों के कल्याण के लिए कामना की गई। उन्होंने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही। हर साल चंडी पाठ के साथ नगर भ्रमण होता है। नई पीढ़ी भी इस सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ रही। समाज में एकता और सद्भाव का संदेश दिया गया।
चंडी पाठ के साथ हुआ देवी का आह्वान
शोभायात्रा के दौरान विद्वान पुरोहितों ने चंडी पाठ किया। दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का सस्वर पाठ हुआ। मंत्रोच्चार से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर गई। मान्यता है कि महालया पर महिषासुरमर्दिनी जागृत होती हैं। असुरों के विनाश के लिए मां का आह्वान होता है। इस पवित्र दिन पूर्वजों का तर्पण भी किया जाता। इसके बाद मां के स्वागत की तैयारियां तेज हो जातीं। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति से देवी का वंदन किया। पूरा क्षेत्र देवी भक्ति के रंग में रंग गया।
ऐतिहासिक दुर्गा बाड़ी में शुरू हुईं पूजा की तैयारियां
जुगसलाई दुर्गा बाड़ी लौहनगरी का प्राचीन पूजा स्थल है। यहां की दुर्गा पूजा का विशेष ऐतिहासिक महत्व है। शोभायात्रा संपन्न होने के बाद पूजा पंडाल में बैठक हुई। पूजा के विधि-विधान और कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। पंडाल निर्माण और विद्युत सज्जा का काम तेज हुआ। महासप्तमी से लेकर विजयादशमी तक विशेष अनुष्ठान होंगे। मां को प्रतिदिन पारंपरिक भोग अर्पित किया जाएगा। स्वयंसेवकों को सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई। भक्तों की सुविधा के लिए सभी प्रबंध किए गए हैं।
लौहनगरी में छाया शारदीय नवरात्र का उल्लास
शोभायात्रा के साथ ही शहर में उत्सव का रंग चढ़ा। बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ने लगी है। जुगसलाई से लेकर साकची तक उत्साह का माहौल है। विभिन्न पूजा कमेटियों ने भी तैयारियां पूरी कर लीं। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जुगसलाई की सड़कों पर दिनभर उत्सव सा दृश्य रहा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को महालया की शुभकामनाएं दीं। शहरवासी मां के दर्शन का बेसब्री से इंतजार कर रहे। हर तरफ दुर्गा पूजा की धूम दिखाई दे रही है।
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