- रांची में आयोजित NEET री-एग्जाम के दौरान NSUI कार्यकर्ताओं ने छात्रों और अभिभावकों के बीच हस्ताक्षर अभियान चलाकर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
Ranchi: राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने रांची में आयोजित NEET री-एग्जाम के दौरान हस्ताक्षर अभियान चलाया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने परीक्षा केंद्रों के बाहर छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से संपर्क कर परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर समर्थन जुटाया। NSUI नेताओं ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आए हैं, जिससे छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह अभियान शुरू किया गया।
छात्रों के हितों की रक्षा के लिए अभियान
NSUI कार्यकर्ताओं ने कहा कि लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों की मेहनत के बाद NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता छात्रों के भविष्य पर सीधा प्रभाव डालती है। संगठन ने मांग की कि परीक्षा आयोजन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाया जाए ताकि छात्रों का विश्वास कायम रहे।
Ranchi News: अभिभावकों और छात्रों ने भी दिया समर्थन
हस्ताक्षर अभियान के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने भाग लिया। अभियान में शामिल लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। NSUI नेताओं का कहना है कि छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को सरकार और संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने के लिए यह अभियान चलाया गया है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग
संगठन ने कहा कि केवल परीक्षा आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो। इसके लिए आधुनिक तकनीक, मजबूत निगरानी व्यवस्था और समयबद्ध जांच तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। NSUI ने भविष्य में भी छात्रों के अधिकारों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने की बात कही।
Ranchi News: युवाओं के भविष्य से जुड़ा है मामला
छात्र संगठनों का मानना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा देश के लाखों युवाओं के करियर से जुड़ी होती है। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद से छात्रों का मनोबल प्रभावित होता है। हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से छात्रों की चिंताओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।



