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Jamshedpur Women’s University News : नए यूनिफॉर्म से छात्राओं पर बढ़ेगा महंगे ब्रांड का बोझ? रेमंड ब्रांड के कपड़े की अनिवार्यता पर चर्चा

– गरीब परिवारों की छात्राओं के हितों को लेकर उठी चिंता, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को लेकर उठे प्रश्न

Jamshedpur Women’s University News : जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में छात्राओं की यूनिफॉर्म खरीद को लेकर जारी किए गए एक टेंडर नोटिस ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कोटेशन आमंत्रण नोटिस में कथित रूप से एक विशेष ब्रांड के कपड़े से यूनिफॉर्म तैयार करने की शर्त शामिल किए जाने को लेकर शिक्षाविदों, अभिभावकों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े जानकारों के बीच चर्चा शुरू हो गई है।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राएं अध्ययनरत हैं। ऐसे में यदि यूनिफॉर्म के लिए किसी महंगे ब्रांड के कपड़े की अनिवार्यता तय की जाती है, तो इसका सीधा आर्थिक प्रभाव छात्राओं और उनके अभिभावकों पर पड़ सकता है।

टेंडर में रेमंड ब्रांड का उल्लेख होने पर उठे सवाल

विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध टेंडर नोटिस के अनुसार यूजी एवं पीजी छात्राओं के लिए यूनिफॉर्म निर्माण हेतु कोटेशन आमंत्रित किए गए हैं। नोटिस में कथित तौर पर रेमंड (Raymond) जैसे प्रीमियम ब्रांड के कपड़े के उपयोग का उल्लेख किया गया है।

जानकारों का कहना है कि किसी सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थान की खरीद प्रक्रिया में यदि किसी विशेष ब्रांड को प्राथमिकता दी जाती है, तो इससे प्रतिस्पर्धा सीमित होने की आशंका उत्पन्न हो सकती है। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या सभी योग्य विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं को समान अवसर उपलब्ध कराया गया है।

गरीब अभिभावकों पर पड़ सकता है अतिरिक्त आर्थिक बोझ

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाली अनेक छात्राएं मजदूर, किसान और निम्न आय वर्ग के परिवारों से आती हैं। ऐसे में यदि यूनिफॉर्म के लिए अपेक्षाकृत महंगे ब्रांड के कपड़े का उपयोग अनिवार्य किया जाता है, तो इससे अभिभावकों का खर्च बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक संस्थानों में किसी भी खरीद प्रक्रिया का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ लागत को भी संतुलित रखना होना चाहिए, ताकि छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक भार न पड़े।

टेंडर नोटिस में हस्ताक्षर नहीं, उठ रहे प्रश्न

चर्चा का एक अन्य विषय टेंडर नोटिस का प्रारूप भी है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज में जारीकर्ता के रूप में “Registrar, Jamshedpur Women’s College” का उल्लेख दिखाई देता है, लेकिन दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं होने की बात भी सामने आ रही है।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है या किसी अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत प्रकाशित किया गया है। फिर भी इस पहलू को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और लोग विश्वविद्यालय प्रशासन के स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर विशेषज्ञों की राय

खरीद प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में टेंडर एवं कोटेशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, प्रतिस्पर्धात्मक और समान अवसर आधारित होनी चाहिए। इससे न केवल बेहतर मूल्य पर सामग्री उपलब्ध होती है, बल्कि प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी बनी रहती है।

उनका कहना है कि यदि किसी विशेष ब्रांड, निर्माता या आपूर्तिकर्ता का उल्लेख आवश्यक हो, तो उसके पीछे स्पष्ट तकनीकी एवं प्रशासनिक आधार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना चाहिए।

विश्वविद्यालय प्रशासन के स्पष्टीकरण पर टिकी निगाहें

फिलहाल इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षाविदों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित शर्तें किन मानकों के आधार पर तय की गईं और क्या प्रक्रिया पूरी तरह नियमों एवं पारदर्शिता के अनुरूप अपनाई गई है।

संबंधित दस्तावेज

विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध टेंडर नोटिस :

https://cas.jwu.ac.in/uploads/newsuploads/Notice%20For%20Inviting%20Quotation.pdf

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