- अवैध कोयला खनन पर बड़ा सवाल, प्रशासन की चुप्पी से उठ रहे संदेह
Jharkhand: झारखंड के हजारीबाग जिले में अवैध कोयला खनन एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में अवैध खनन के दौरान दो लोगों की मौत हो गई, लेकिन घटना के बाद भी कोल माफिया के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई या FIR दर्ज नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से संगठित तरीके से कोयले की चोरी की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां कार्रवाई करने में विफल साबित हो रही हैं।
अवैध खनन के दौरान हुई थी दो लोगों की मौत
जानकारी के अनुसार, हजारीबाग के बड़कागांव क्षेत्र स्थित एक कोयला परियोजना के पास अवैध खनन के दौरान मिट्टी धंसने से दो लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतकों के शव मलबे से निकाले गए, जबकि मामले में विस्तृत जांच की बात कही गई।
Hazaribag News: आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है अवैध कारोबार?
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अवैध कोयला खनन कोई नई बात नहीं है। रात के अंधेरे में ट्रैक्टर, पिकअप और अन्य वाहनों के जरिए कोयला विभिन्न स्थानों तक पहुंचाया जाता है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में कोयले का अवैध परिवहन आखिर किसकी जानकारी के बिना संभव है? हजारीबाग और आसपास के इलाकों में पहले भी अवैध कोयला कारोबार के कई मामले सामने आ चुके हैं। विभिन्न जांच एजेंसियों और पुलिस द्वारा समय-समय पर कोयला लदे वाहनों को जब्त किया गया है तथा अवैध परिवहन के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
FIR नहीं होने से बढ़ी लोगों की नाराजगी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब अवैध खनन के कारण लोगों की जान चली गई, तब संबंधित लोगों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए थी। लेकिन घटना के बाद भी कोल माफिया के खिलाफ FIR नहीं होने से प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए केवल छोटे वाहनों की जब्ती पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की पहचान और उसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
Hazaribag News: हजारीबाग में पहले भी सामने आते रहे हैं कोयला माफिया के मामले
हजारीबाग जिला लंबे समय से कोयला तस्करी और अवैध खनन की घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है। कई मामलों में पुलिस ने ट्रकों और ट्रैक्टरों से अवैध कोयला बरामद किया है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियों ने भी कोयला कारोबार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच की है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अवैध खनन से न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि इससे लोगों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। खदानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध उत्खनन के कारण लगातार दुर्घटनाएं सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
Hazaribag News: स्थानीय लोगों की मांग
- कोल माफिया के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज हो।
- अवैध खनन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- कोयला चोरी और अवैध परिवहन में शामिल लोगों की पहचान सार्वजनिक की जाए।
- खदान क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
- दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



