Ranchi: Jharkhand High Court ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन और बकाया वेतनमान लाभ नहीं दिए जाने के मामले में राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन कर्मचारियों ने लगभग 40 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखना दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है।
हाई कोर्ट ने सरकार को दिया सख्त निर्देश
न्यायमूर्ति Deepak Roshan की अदालत ने बसंत कुमार साहू समेत 15 प्रार्थियों द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि अगली सुनवाई, जो 22 जून को निर्धारित है, तक प्रार्थियों को पेंशन और पंचम से सप्तम वेतनमान तक का बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो उच्च शिक्षा निदेशक का वेतन रोक दिया जाएगा।
Jharkhand education department: अदालत ने जताई अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी
मामले में प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता Prem Pujari ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि पूर्व आदेशों के बावजूद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब तक उनका वैधानिक लाभ नहीं दिया गया है। इस पर अदालत ने अधिकारियों की कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए कहा कि बार-बार आश्वासन देने के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है।
चौथी बार अदालत में पेश हुए उच्च शिक्षा निदेशक
सुनवाई के दौरान उच्च शिक्षा निदेशक चौथी बार अदालत में उपस्थित हुए। इस बार वे वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। इससे पहले हुई तीन सुनवाई में उन्होंने अदालत को अंडरटेकिंग देकर भरोसा दिलाया था कि कर्मचारियों को शीघ्र पेंशन और बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।
Jharkhand education department: 12 सप्ताह में भुगतान का दिया गया था आदेश
उच्च शिक्षा निदेशक ने पहले अदालत को जानकारी दी थी कि मामले के समाधान के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो 16 सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित करेगी। हालांकि अदालत ने इस अवधि को घटाकर 12 सप्ताह कर दिया था और निर्धारित समय के भीतर भुगतान का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अब तक आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।
बीएन जालान कॉलेज और सिसई कॉलेज के कर्मचारी हैं प्रार्थी
मामले के प्रार्थी बीएन जालान कॉलेज और सिसई, गुमला के तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी रहे हैं, जो वर्ष 2022-23 में सेवानिवृत्त हुए थे। कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें पेंशन और चतुर्थ से सप्तम वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
Jharkhand education department: सेवा समायोजन के बावजूद नहीं मिला लाभ
प्रार्थियों के अनुसार Ranchi University ने वर्ष 2005 में ही उनके सेवा समायोजन को मान्यता दे दी थी। इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सेवा समायोजन को स्वीकृति नहीं दी गई। परिणामस्वरूप समान पदों पर कार्यरत अन्य कर्मचारियों को जहां सप्तम वेतनमान का लाभ मिल रहा है, वहीं प्रार्थी अब भी चतुर्थ वेतनमान का लाभ लेने को मजबूर हैं।
अदालत ने अपील के तर्क को नहीं माना
सरकार की ओर से दलील दी गई कि एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई है। इस पर अदालत ने स्पष्ट कहा कि अपील लंबित रहने का यह अर्थ नहीं है कि कर्मचारियों के पेंशन और वेतन पुनरीक्षण से जुड़े लाभ रोके जाएं।



