ओडिशा से पहुंचे परिजनों ने की शिनाख्त, बहला-फुसलाकर रखने वाला आरोपी शंकर दास गिरफ्तार, भेजा गया जेल
Gamharia Rape Case के तहत सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में घटित दुष्कर्म मामले में एक सनसनीखेज कानूनी मोड़ सामने आया है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई गहन चिकित्सीय व दस्तावेजी जांच में पीड़िता के नाबालिग होने की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। पीड़िता के नाबालिग साबित होने के बाद अभियोजन का दायरा काफी बढ़ गया है। अब मुख्य आरोपी सिपाही समेत घटना में परोक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त अन्य पुलिसकर्मियों पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की सख्त गैर-जमानती धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
Gamharia Rape Case: पिछले छह महीने से लापता थी किशोरी
इस मामले में नया खुलासा तब हुआ जब विभिन्न समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर मामले से जुड़ी खबरें और तस्वीरें प्रकाशित हुईं। इन खबरों के जरिए पड़ोसी राज्य ओडिशा के मयूरभंज और बड़बिल क्षेत्र में रहने वाले परिजनों ने पीड़िता की पहचान की। इसके तुरंत बाद एक मानवाधिकार संगठन के प्रतिनिधियों की मदद लेकर परिजन सरायकेला पहुंचे और गम्हरिया थाना पुलिस से संपर्क साधा।
परिजनों ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि यह किशोरी पिछले करीब छह महीने से अपने घर से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता थी। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। परिजनों ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि शंकर दास नामक एक युवक उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले आया था। वह किशोरी को गम्हरिया इलाके में रखकर पत्नी की तरह उसके साथ रह रहा था।
Gamharia Rape Case: भगा कर लाने के आरोपी के खिलाफ हुई त्वरित कार्रवाई
परिजनों से मिली लिखित शिकायत पर सरायकेला पुलिस ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई की। पुलिस टीम ने छापेमारी कर आरोपी शंकर दास को धर दबोचा। पुलिस ने शंकर दास के खिलाफ नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और उसका शोषण करने के आरोप में पॉक्सो एक्ट की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। आवश्यक कानूनी और चिकित्सीय औपचारिकताओं के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
अब मामले में दोहरी कानूनी कार्रवाई चल रही है। एक तरफ जहां किशोरी को भगाने वाले मुख्य आरोपी को जेल भेजा गया है, वहीं थाना परिसर में खाकी को कलंकित करने वाले दोषी आरक्षी और उसके सहयोगियों पर भी पॉक्सो अधिनियम के कठोर प्रावधानों के तहत अभियोजन चलाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
15 पुलिसकर्मी पहले ही हो चुके हैं निलंबित, नई टीम ने संभाली कमान
उल्लेखनीय है कि इस शर्मनाक घटना के सामने आते ही सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने कठोर प्रशासनिक कदम उठाए थे। कर्तव्य में गंभीर लापरवाही और शिथिलता बरतने के आरोप में तत्कालीन थाना प्रभारी सहित कुल 15 पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इसके साथ ही मुख्य आरोपी सिपाही समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
बीते 29 अक्टूबर से प्रभावित गम्हरिया थाने में प्रशासनिक शून्यता को खत्म करते हुए नए सिरे से पुलिस व्यवस्था बहाल कर दी गई है। नवनियुक्त थाना प्रभारी राजेश टुडू के नेतृत्व में पुलिस के नए दल ने पूरी जिम्मेदारी संभाल ली है। थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पेट्रोलिंग और रात्रि गश्ती दलों को फिर से पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन का मुख्य ध्येय घटना से आहत आम नागरिकों के बीच पुलिस तंत्र और सुरक्षा को लेकर विश्वास को दोबारा सुदृढ़ करना है।
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