हॉस्टल निर्माण की तैयारी के बीच पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल
GLA College (गणेश लाल अग्रवाल कॉलेज), मेदिनीनगर, पलामू में प्रस्तावित गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण अब पेड़ों की कटाई को लेकर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाया जाना है। इसके लिए कॉलेज परिसर की जमीन चिह्नित की गई है। हालांकि, निर्माण स्थल पर मौजूद पेड़ों की वास्तविक संख्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में 118 पेड़ों का जिक्र है। वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि इस जमीन पर 200 से अधिक पेड़ मौजूद हैं।
GLA College की जमीन पर बनेगा छात्राओं का हॉस्टल
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप संचालित की जा रही है। इसके तहत Gender Inclusion and Equity Initiatives यानी लैंगिक समावेशन और समानता से जुड़ी पहल को भी बढ़ावा दिया जाता है।
इसी योजना के तहत पलामू जिले में छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण की परियोजना स्वीकृत की गई है। झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के अंतर्गत GLA कॉलेज, मेदिनीनगर में छात्रावास निर्माण के लिए 9 करोड़ 96 लाख 69 हजार 800 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। यह स्वीकृति 7 जनवरी 2026 के सरकारी आदेश में दर्ज है।

GLA College: भवन निर्माण निगम ने तैयार किया 9.96 करोड़ का डीपीआर
प्रस्तावित गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण झारखंड भवन निर्माण निगम के माध्यम से कराया जाना है। इसके लिए निगम ने लगभग 9.96 करोड़ रुपये का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना को तकनीकी स्वीकृति भी मिल चुकी है।
हॉस्टल के लिए GLA कॉलेज परिसर की जमीन को चिह्नित किया गया है। इस कॉलेज की स्थापना के लिए गणेश लाल अग्रवाल ने जमीन दान में दी थी। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) का भवन भी इसी परिसर की जमीन पर स्थित है। ऐसे में प्रस्तावित निर्माण स्थल कॉलेज परिसर के महत्वपूर्ण हिस्से में आता है।
पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से मांगी गई अनुमति
जिस स्थान पर गर्ल्स हॉस्टल बनाने की योजना है, वहां बड़ी संख्या में पेड़ लगे हुए हैं। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इन पेड़ों को हटाने की जरूरत बताई गई है। इसी को देखते हुए कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने वन विभाग को पत्र लिखकर पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी थी।
कॉलेज के आवेदन के बाद संबंधित रेंजर ने प्रस्तावित निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट वन प्रमंडल पदाधिकारी को सौंपी। रिपोर्ट में कुल 118 पेड़ों का उल्लेख किया गया है। इनमें यूकलिप्टस के 117 और सागवान का एक पेड़ शामिल बताया गया है।
रिपोर्ट में पेड़ों की मोटाई 60 से 260 सेंटीमीटर तक दर्ज की गई है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर वन विभाग में पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक पेड़ काटने की अंतिम अनुमति नहीं मिली है।
स्थानीय लोगों ने पेड़ों की गिनती पर उठाए सवाल
वन विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद पेड़ों की संख्या को लेकर स्थानीय स्तर पर असहमति सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रस्तावित निर्माण स्थल पर केवल 118 पेड़ नहीं हैं। वहां 200 से अधिक पेड़ मौजूद हैं।
लोगों के दावे के अनुसार, परिसर में यूकलिप्टस, शीशम और सागवान समेत कई प्रजातियों के पेड़ हैं। इसके अलावा वन विभाग की ओर से लगाए गए पौधे और पेड़ भी वहां मौजूद हैं। इनकी सुरक्षा के लिए विभाग ने कुछ स्थानों पर घेराबंदी भी कर रखी है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि वन विभाग की रिपोर्ट में पेड़ों की संख्या कम दर्ज की गई है, तो इसकी दोबारा जांच क्यों नहीं कराई गई? उनका कहना है कि निर्माण से पहले पूरे स्थल का नए सिरे से सर्वे होना चाहिए। इससे पेड़ों की वास्तविक संख्या और उनकी प्रजातियों की सही जानकारी सामने आ सकेगी।
25 अगस्त को बनाई गई थी तीन सदस्यीय कमेटी
इस मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। GLA कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ने 25 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी किया था। इसके तहत वन विभाग के साथ समन्वय और आवश्यक सहयोग के लिए एक कमेटी गठित की गई।
इस कमेटी में डॉक्टर नीतू कमारी, एन नवाज और सुखदेव को शामिल किया गया है। कमेटी का गठन वन विभाग से संबंधित प्रक्रिया में सहयोग करने के उद्देश्य से किया गया था।
हॉस्टल निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा साबित हो सकता है। खासकर दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को इससे रहने की बेहतर व्यवस्था मिलेगी। PM-USHA के तहत इस तरह की परियोजनाओं का उद्देश्य उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी और सुविधाओं को बढ़ाना है।
हालांकि, विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखना भी जरूरी है। इस मामले में पेड़ों की संख्या को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। एक ओर वन विभाग की रिपोर्ट में 118 पेड़ों का उल्लेख है। दूसरी ओर स्थानीय लोग 200 से अधिक पेड़ होने की बात कह रहे हैं।
ऐसे में निर्माण कार्य शुरू होने से पहले स्थल का संयुक्त और पारदर्शी सर्वे कराया जाना महत्वपूर्ण होगा। इसमें कॉलेज प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी होनी चाहिए। इससे पेड़ों की सही संख्या, प्रजातियों और कटाई की आवश्यकता का आकलन किया जा सकेगा।
फिलहाल इस पूरे मामले में पेड़ों की वास्तविक संख्या और वन विभाग की अनुमति सबसे महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं। छात्रावास निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन पेड़ों की कटाई को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस विवाद का समाधान किस तरह निकालते हैं और छात्राओं के लिए प्रस्तावित हॉस्टल का निर्माण पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए कैसे आगे बढ़ता है।
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