अधिकार विहीन कुलपति द्वारा नियम विरुद्ध काम की शिकायत, राजभवन ने पत्र भेजकर दी चेतावनी
NPU Palamu Controversy: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में नया विवाद सामने आया है। वहां रात में दफ्तर खोलकर नियम विरुद्ध काम हो रहा था। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। अधिकार विहीन कुलपति दिनेश कुमार सिंह पर आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ राज्यपाल सचिवालय को लिखित शिकायत मिली थी। इसके बाद राजभवन ने विश्वविद्यालय को कड़ा पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा। राजभवन के इस कड़े कदम से विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया है।
NPU Palamu Controversy: राज्यपाल सचिवालय को मिली थी रात में दफ्तर खोलने की शिकायत
राज्यपाल सचिवालय को हाल ही में एक शिकायती पत्र मिला था। इसमें कुलपति और अन्य अधिकारियों पर मनमानी के आरोप थे। अधिकार छिनने के बाद भी लगातार मनमानी की शिकायत मिली थी। कुलपति रात के समय विश्वविद्यालय का कार्यालय खुलवाते हैं। रात के अंधेरे में कई गैर-कानूनी काम किए जा रहे हैं। फाइलों और गोपनीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है। राजभवन ने इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। सचिवालय ने दोषी अधिकारियों को दो टूक चेतावनी जारी कर दी है। आदेश की अनदेखी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
NPU Palamu Controversy: स्पेशल ऑडिट में खुली थी वित्तीय गड़बड़ी, बर्खास्तगी की अनुशंसा
राज्यपाल के आदेश पर विश्वविद्यालय का स्पेशल ऑडिट हुआ था। ऑडिट रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी पकड़ी गई थी। वित्तीय अनियमितताओं में कुलपति दिनेश कुमार सिंह की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद राज्यपाल ने उनके सभी अधिकार छीन लिए थे। उनकी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां पूरी तरह जब्त हो चुकी हैं। राज्यपाल ने उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव भी भेजा है। बर्खास्तगी का यह प्रस्ताव अभी राज्य सरकार के पास विचाराधीन है। अधिकार छिनने के बाद भी कुलपति कामकाज में दखल दे रहे थे।
अधिकार जब्त होते ही रात में जारी किया था नए रजिस्ट्रार का आदेश
शक्तियां जब्त होने के दिन ही एक अजीबोगरीब मामला सामने आया था। अधिकार छिनते ही कुलपति ने रात में कार्यालय खुलवाया था। उन्होंने डॉक्टर मृत्युंजय कुमार को रजिस्ट्रार बनाने का आदेश निकाला था। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग के पुराने आदेश का सहारा लिया था। विभाग ने तब सिर्फ वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा था। कुलपति ने बिना अधिकार के ही यह आदेश जारी कर दिया था। इस आदेश के जारी होते ही भारी विवाद खड़ा हो गया था। राजभवन ने भी इस असंवैधानिक कदम पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।
उच्च शिक्षा विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था का आदेश लिया वापस
मामला तूल पकड़ते ही उच्च शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था से जुड़ा अपना आदेश वापस ले लिया है। इस फैसले के बाद कुलपति का मनमाना आदेश निष्प्रभावी हो गया है। सरकार के इस कदम से अवैध नियुक्ति पर रोक लग गई है। राजभवन ने स्पष्ट किया है कि कामकाज पूरी तरह नियम सम्मत होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी अधिकारी को छोड़ा नहीं जाएगा। वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए अब कड़ी निगरानी हो रही है। आने वाले दिनों में कई और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
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