- 20 मई तक समझौता लागू नहीं हुआ तो बंद होगा खदान संचालन
Jharkhand: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा स्थित रांजाबुरु माइंस में स्थानीय रोजगार को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। मंगलवार को खदान प्रभावित गांवों के मुंडा-मानकी, ग्रामीणों और सारंडा विकास समिति ने संयुक्त रूप से सेल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 20 मई तक पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू नहीं किया गया, तो गुवा खदान, लौह अयस्क डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग कार्य को अनिश्चितकालीन बंद कर दिया जाएगा। आंदोलन को लेकर पूरे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
बाहरी लोगों की नियुक्ति पर ग्रामीणों में नाराजगी
गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने कहा कि स्थानीय लोगों की जमीन और संसाधनों पर बाहरी लोगों का कब्जा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन और समझौते के बावजूद ठेका कंपनी “मां सरला” द्वारा ड्राइवर, खलासी, झंडा कर्मी समेत अन्य पदों पर बाहरी लोगों की नियुक्ति की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के स्थानीय युवा लंबे समय से रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे युवाओं में भारी आक्रोश है।
Jharkhand news: त्रिपक्षीय वार्ता में हुआ था रोजगार देने का समझौता
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में हुए आंदोलन के बाद मंत्री दीपक बिरुवा, प्रशासनिक अधिकारियों, सेल के मुख्य महाप्रबंधक और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। इस बैठक में खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को 75 प्रतिशत रोजगार देने पर सहमति बनी थी। इसके अलावा स्थानीय समिति को कार्य आवंटित करने, ट्रांसपोर्टिंग और रैक लोडिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आश्वासन दिया गया था।
समझौता लागू नहीं होने पर आंदोलन और उग्र करने की चेतावनी
सारंडा विकास समिति और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समझौते के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन और मंत्री के पीए की ओर से वार्ता का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन फिलहाल स्थगित किया गया है। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 20 मई की वार्ता में ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा और खदान संचालन पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।
Jharkhand news: स्थानीय रोजगार को लेकर बढ़ रहा संघर्ष
सारंडा क्षेत्र में स्थानीय रोजगार का मुद्दा लगातार बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खदानों से होने वाले विकास का लाभ स्थानीय युवाओं को मिलना चाहिए। रोजगार और भागीदारी की मांग को लेकर ग्रामीण अब निर्णायक लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।
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