यूपी ईओडब्ल्यू ने अरगोड़ा से मधुमिता कौर को दबोचा, चार राज्यों में दर्ज हैं 26 मुकदमे
Ranchi EOW Arrest: यूपी ईओडब्ल्यू को बड़ी सफलता मिली है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम ने रांची में छापा मारा। इस दौरान ईओडब्ल्यू की टीम ने वी-केयर मल्टीट्रेड कंपनी की सीईओ को गिरफ्तार किया है, जिनका नाम मधुमिता कौर बताया गया है। उनके खिलाफ 250 करोड़ के घोटाले का आरोप है। ईओडब्ल्यू ने मधुमिता कौर को अरगोड़ा थाना क्षेत्र से पकड़ा। वह रांची के पीपी कंपाउंड हिंदपीढ़ी की निवासी है। उसके खिलाफ चार राज्यों में 26 मुकदमे दर्ज हैं।
Ranchi EOW Arrest: लखनऊ के कृष्णानगर थाने में दर्ज था केस
यह गिरफ्तारी लखनऊ में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर हुई। कृष्णानगर थाने में कांड संख्या 349/12 दर्ज था। ईओडब्ल्यू इस मामले की जांच 1/16 के तहत कर रही। रांची कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड हासिल किया गया। इसके बाद पुलिस टीम उसे लखनऊ ले गई। आरोपी को लखनऊ की अदालत में पेश किया गया। जांच एजेंसी अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश जारी है।
Ranchi EOW Arrest: चार राज्यों में फैला था ठगी का नेटवर्क
जांच एजेंसी के अनुसार यह एक अंतरराज्यीय गिरोह था। आरोपियों के खिलाफ कुल 26 मुकदमे दर्ज मिले हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कई केस दर्ज हैं। बिहार और झारखंड में भी एफआईआर दर्ज कराई गई। कंपनी के निदेशकों ने हजारों निवेशकों को ठगा। भारी मुनाफे का लालच देकर पैसे ऐंठते थे। ठगी की रकम से अवैध संपत्तियां बनाई गईं। पीड़ितों ने विभिन्न थानों में शिकायत दर्ज कराई थी।
नामी कंपनियों की बीमा पॉलिसी के नाम पर फर्जीवाड़ा
वी-केयर मल्टीट्रेड कंपनी 2008-09 में पंजीकृत हुई थी। इसका पंजीकरण दिल्ली और हरियाणा में कराया गया था। कंपनी ने लखनऊ के कृष्णानगर में क्षेत्रीय कार्यालय खोला। कंपनी ने बड़े निजी बीमा ब्रांड्स का सहारा लिया। रिलायंस लाइफ, एचडीएफसी लाइफ और एगॉन लाइफ की पॉलिसियां बेचीं। पॉलिसी पर भारी रिटर्न और अतिरिक्त लाभ का झांसा दिया। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई वित्तीय प्रलोभन दिए। लोग उनके चिकने-चुपड़े वादों में फंसते चले गए।
रेफरल मॉडल के जरिए खड़ा किया ठगी का जाल
कंपनी ने नेटवर्क बढ़ाने के लिए नया तरीका अपनाया। ग्राहकों को रेफरल मॉडल से जोड़ा जाता था। नए ग्राहक जोड़ने पर दूसरा प्रीमियम भरने का वादा था। इस झांसे में आकर लोगों ने परिजनों को जोड़ा। हजारों लोगों ने बीमा पॉलिसी में गाढ़ी कमाई लगाई। लेकिन कंपनी ने दूसरे साल का प्रीमियम कभी नहीं भरा। इससे ग्राहकों की पॉलिसियां बंद होने की कगार पर पहुंचीं। अचानक कार्यालय बंद कर सभी संचालक फरार हो गए।
करोड़ों का कमीशन और निवेशकों का पैसा डकारा
ईओडब्ल्यू की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। कंपनी ने बीमा कंपनियों से भारी कमीशन बटोरा। साथ ही ग्राहकों के निवेश की राशि भी गबन की। पैसा दूसरे फर्जी खातों में डायवर्ट किया गया। इस घोटाले में कई बड़े कारोबारी शामिल बताए जाते हैं। पुलिस अब कंपनी के बैंक खातों की पड़ताल कर रही। संपत्ति जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल्द ही मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी होगी।
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