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Kolhan University Big Initiative : कोल्हान विश्वविद्यालय में “साहित्यिक चोरी” पर लगेगी लगाम, ‘ड्रिलबिट’ सॉफ्टवेयर से शोध में बढ़ेगी पारदर्शिता

Jamshedpur/Chaibasa (Jharkhand) : कोल्हान विश्वविद्यालय (KU), चाईबासा अब शोध और अकादमिक लेखन में मौलिकता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी रूप से और भी सशक्त होने जा रहा है। विश्वविद्यालय के वीर पोटो हो सभागार में “शैक्षणिक सत्यनिष्ठा के लिए प्लेजरिज्म डिटेक्शन” (साहित्यिक चोरी की पहचान) विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला सह प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों और शिक्षकों को ‘ड्रिलबिट’ (DrillBit) सॉफ्टवेयर के उपयोग से परिचित कराना था, ताकि भविष्य में होने वाले शोध कार्यों में साहित्यिक चोरी को पूरी तरह रोका जा सके।

कुलपति ने दिया ‘ईमानदारी और मौलिकता’ का मंत्र

कार्यशाला की मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता थीं। उन्होंने पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। अपने संबोधन में कुलपति ने शोध कार्यों में ईमानदारी और मौलिकता के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक जगत में सत्यनिष्ठा सबसे महत्वपूर्ण है और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर हम विश्वविद्यालय की शोध गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बना सकते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को इस नई तकनीक को सीखने और अपनाने की शुभकामनाएं दीं।

ड्रिलबिट सॉफ्टवेयर : एआई और मशीन लर्निंग से होगी पहचान

कार्यशाला के मुख्य वक्ता (Resource Person) ड्रिलबिट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीनियर रीजनल मैनेजर सौम्यजीत दत्ता चौधरी थे। उन्होंने प्रतिभागियों को ड्रिलबिट सॉफ्टवेयर के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।

तकनीकी विशेषता

उन्होंने बताया कि यह सॉफ्टवेयर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग कर विभिन्न वैश्विक स्रोतों से सामग्री का मिलान करता है और साहित्यिक चोरी की बारीकी से पहचान करता है।

यूजीसी की मान्यता

सौम्यजीत दत्ता चौधरी ने बताया कि ड्रिलबिट को यूजीसी (UGC) द्वारा मान्यता प्राप्त है। किफायती और प्रभावी होने के कारण यह शैक्षणिक संस्थानों के लिए शोध की पारदर्शिता बनाए रखने का एक बेहतरीन विकल्प है।

विशेषज्ञों ने साझा किए शोध की गुणवत्ता सुधारने के सूत्र

विशिष्ट अतिथि और कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रंजीत कर्ण ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने शोध के क्षेत्र में प्लेजरिज़्म की गंभीरता और इसके कारण होने वाले शैक्षणिक नुकसानों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के प्रथम सत्र में “प्लेजरिज्म एवं शैक्षणिक सत्यनिष्ठा की समझ” विषय पर गहन चर्चा हुई, जिसमें शिक्षकों और शोधार्थियों ने अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल कोल्हान विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता, पारदर्शिता और नैतिकता को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यशाला के संयोजक विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. नितीश कुमार महतो थे। कार्यक्रम का संचालन मानवशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी मुंडा ने किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नितीश कुमार महतो ने किया। इस अवसर पर विभिन्न पीजी विभागों के शिक्षक, शोधार्थी, आईक्यूएसी (IQAC) एवं आरडीसी (RDC) समन्वयक तथा विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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