- हाई कोर्ट ने पूछा- सचिव की जगह अवर सचिव ने शपथ पत्र क्यों दाखिल किया? सभी जिलों में भूमि सर्वे पूरा होने की समय-सीमा भी मांगी
Jharkhand: झारखंड में चल रहे भूमि सर्वेक्षण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और पूछा कि जब पिछली सुनवाई में विभागीय सचिव को स्वयं जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, तो उनकी जगह विभाग के अवर सचिव ने शपथ पत्र क्यों दाखिल किया। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय सचिव को स्वयं शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।
Jharkhand News: 15 जुलाई तक सचिव को स्वयं दाखिल करना होगा शपथ पत्र
हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव स्वयं 15 जुलाई 2026 तक शपथ पत्र दाखिल करें। अदालत ने यह भी कहा कि यदि पिछली सुनवाई के बाद भूमि सर्वेक्षण से संबंधित कोई नई प्रगति हुई है, तो उसकी विस्तृत जानकारी भी शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत की जाए।
सभी जिलों में भूमि सर्वे पूरा होने की समय-सीमा मांगी
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि झारखंड के सभी जिलों में भूमि सर्वेक्षण का कार्य आखिर कब तक पूरा होगा। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह सर्वे कार्य की विस्तृत समय-सीमा (Timeline) प्रस्तुत करे, ताकि परियोजना की वास्तविक प्रगति का आकलन किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
Jharkhand News: 1932 के बाद अधूरा है व्यापक भूमि सर्वे
जनहित याचिका दायर करने वाले गोकुल चंद की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड में अंतिम व्यापक भूमि सर्वेक्षण वर्ष 1932 में किया गया था। इसके बाद वर्ष 1980 से दोबारा सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन कई दशक बीत जाने के बावजूद यह कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका। याचिका में कहा गया कि अधूरे भूमि सर्वे के कारण राज्य में भूमि विवाद, सीमांकन संबंधी समस्याएं और प्रशासनिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
सरकार ने बताया- दो जिलों में पूरा हुआ सर्वे
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड में भूमि सर्वेक्षण का कार्य लगातार जारी है। सरकार के अनुसार लातेहार और लोहरदगा जिलों में सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि राज्य के अन्य जिलों में यह प्रक्रिया विभिन्न चरणों में चल रही है।
Jharkhand News: प्रगति रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने जताई सख्ती
हालांकि अदालत सरकार के जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखी। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल सामान्य जानकारी ही पर्याप्त नहीं है। खंडपीठ ने विभागीय सचिव को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट, सर्वे कार्य की वर्तमान स्थिति तथा सभी जिलों में कार्य पूरा होने की समय-सीमा के साथ शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।
भूमि विवादों के समाधान में अहम है सर्वे
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर भूमि सर्वेक्षण पूरा होने से भूमि स्वामित्व से जुड़े विवादों में कमी आएगी, सरकारी रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी होंगे तथा विकास परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं में भी तेजी आएगी।



