कामडारा में हाथियों को भगाने निकले ग्रामीण पर हमला, गांव में दहशत
Gumla News: झारखंड के गुमला जिले के कामडारा थाना क्षेत्र के बुरुहातू गांव के सुकड़ा टांड़ में जंगली हाथी के हमले में 40 वर्षीय ग्रामीण निकोलस तोपनो की मौत हो गई। घटना रविवार देर रात की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, इलाके में पिछले कई दिनों से जंगली हाथियों का झुंड घूम रहा था। हाथियों को गांव से दूर भगाने के प्रयास में निकोलस तोपनो की जान चली गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है, जबकि ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी भी देखी जा रही है।
Gumla News: हाथियों के झुंड से परेशान थे ग्रामीण
बुरुहातू और आसपास के गांवों में पिछले कई दिनों से हाथियों के झुंड की आवाजाही बनी हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे। धान के अलावा केला, गन्ना, आलू, फूलगोभी और शकरकंद की फसल भी प्रभावित हुई है। लगातार हो रहे नुकसान के कारण ग्रामीण परेशान थे और हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर ले जाने की मांग कर रहे थे।
बताया गया कि इलाके में करीब 23 हाथियों का झुंड घूम रहा था। हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल था। रात के समय घरों से बाहर निकलना भी जोखिम भरा हो गया था। इसके बावजूद फसलों और गांव को बचाने के लिए ग्रामीण हाथियों को भगाने की कोशिश कर रहे थे।
Gumla News: हाथी को भगाने निकले निकोलस तोपनो पर हमला
जानकारी के मुताबिक, रविवार देर रात करीब एक बजे निकोलस तोपनो हाथियों को भगाने के लिए घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान उनका सामना एक जंगली हाथी से हो गया। हाथी ने उन्हें अपनी सूंड़ में लपेट लिया और करीब आधा किलोमीटर तक घसीटते हुए ले गया। इसके बाद हाथी ने उन्हें जमीन पर पटक दिया और कुचल दिया। इस हमले में निकोलस तोपनो की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने घटना पर दुख जताते हुए हाथियों के झुंड को जल्द से जल्द आबादी वाले इलाकों से दूर ले जाने की मांग की। उनका कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही से जान-माल का खतरा बना हुआ है।
वन विभाग की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाथियों का झुंड कई दिनों से इलाके में मौजूद था और लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहा था। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों को पहले ही गांवों से दूर ले जाने की व्यवस्था की जाती, तो ऐसी घटना को रोकने में मदद मिल सकती थी।
सोमवार सुबह वन विभाग की टीम गांव पहुंची। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं और हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी वाले क्षेत्रों से दूर ले जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि फसलों की बर्बादी के साथ-साथ अब लोगों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में विभाग को हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हुए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
मृतक के परिवार को एक लाख रुपये की तत्काल सहायता
घटना के बाद वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को तत्काल सहायता के रूप में एक लाख रुपये दिए गए। विभाग ने शेष मुआवजे की राशि एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा ग्रामीणों को मुआवजे से संबंधित आवेदन फॉर्म भी उपलब्ध कराए गए।
हाथियों से बचाव के लिए ग्रामीणों को टॉर्च और पटाखे भी दिए गए। वन विभाग की टीम हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर नजर रख रही है। विभाग का प्रयास है कि हाथियों को धीरे-धीरे सारंडा के जंगल की ओर ले जाया जाए, ताकि गांवों में उनके प्रवेश और लोगों के साथ टकराव की आशंका कम हो सके।
वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के पास जाने या उन्हें खुद भगाने की कोशिश न करें। खासकर रात के समय अकेले घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने और विभाग को सूचना देने को कहा गया है।
निकोलस तोपनो की मौत ने इलाके में मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता को एक बार फिर सामने ला दिया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग हाथियों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी रखेगा और प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा उपलब्ध कराने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।


