एआई और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच 2.8 गीगावाट से अधिक अवसरों पर नजर, 18 कंपनियों के साथ काम कर रही है टाटा पावर
Data Centre : पूर्वी सिंहभूम, 14 अक्टूबर (हि.स.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से भारत में डेटा सेंटर उद्योग का तेजी से विस्तार हो रहा है। इस क्षेत्र में बिजली की मांग भी बढ़ रही है। इसे देखते हुए टाटा पावर ने अपनी कारोबारी रणनीति में डेटा सेंटर क्षेत्र को अहम स्थान दिया है। कंपनी के पास इस क्षेत्र में 2.8 गीगावाट से अधिक क्षमता से जुड़े अवसरों का पोर्टफोलियो है। इसके जरिए कंपनी बिजली आपूर्ति से लेकर पारेषण, वितरण और हरित ऊर्जा तक अपनी सेवाओं का विस्तार करना चाहती है।
Data Centre क्षेत्र में 18 घरेलू और वैश्विक कंपनियों से जुड़ाव
टाटा पावर की ओर से 14 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, कंपनी 18 प्रमुख घरेलू और वैश्विक डेटा सेंटर संचालकों के साथ काम कर रही है। इस दिशा में कुल 29 कार्यक्षेत्रों में गतिविधियां चल रही हैं। इनमें बिजली वितरण, पारेषण और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े अवसर शामिल हैं। कंपनी का जोर डेटा सेंटर संचालकों को उनकी जरूरत के मुताबिक एकीकृत ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराने पर है।
कंपनी के अनुसार, कुल अवसरों के पोर्टफोलियो में वितरण नेटवर्क के तहत आने वाले आगामी डेटा सेंटरों की करीब 430 मेगावाट बिजली मांग शामिल है। वहीं, पारेषण से जुड़े अवसरों की क्षमता 1,236 मेगावाट है। इसके अलावा, 1,150 मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता से संबंधित प्रस्तावों पर भी काम किया जा रहा है। ये आंकड़े अलग-अलग श्रेणियों के अवसरों को दर्शाते हैं। इन्हें पूरी हो चुकी परियोजनाओं या सुनिश्चित बिजली आपूर्ति के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
Data Centre के लिए बिजली व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी
डेटा सेंटर सामान्य व्यावसायिक इमारतों से अलग होते हैं। यहां बड़ी मात्रा में डिजिटल आंकड़ों का भंडारण और प्रसंस्करण किया जाता है। एआई मॉडल, क्लाउड सेवाओं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए इन केंद्रों को लगातार बिजली की जरूरत होती है। बिजली आपूर्ति में रुकावट आने से सेवाओं पर असर पड़ सकता है। इसलिए इनके लिए मजबूत ग्रिड, पर्याप्त बिजली क्षमता और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था जरूरी है।
टाटा पावर की योजना इसी जरूरत को ध्यान में रखकर अपनी सेवाओं का विस्तार करने की है। कंपनी बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी का लाभ उठाना चाहती है। इसके तहत डेटा सेंटर परियोजनाओं को ग्रिड से जोड़ने, नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने और जरूरी बिजली बुनियादी ढांचा तैयार करने जैसे विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है।
मुंबई में 15,000 करोड़ रुपये की ग्रिड विस्तार योजना
मुंबई महानगर क्षेत्र में डेटा सेंटर उद्योग की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए टाटा पावर अपने बिजली पारेषण नेटवर्क को मजबूत कर रही है। इसके तहत 110 केवी और 220 केवी नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की योजना है। बिजली रूपांतरण व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा, आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति से निपटने के लिए नेटवर्क में वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
कंपनी नए रिसीविंग स्टेशन बनाने और 400 केवी का पारेषण रिंग नेटवर्क विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य बड़े डेटा सेंटरों को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के लिए ग्रिड की क्षमता बढ़ाना है। ये कदम मुंबई ग्रिड के उन्नयन और विस्तार के लिए तैयार 15,000 करोड़ रुपये की योजना का हिस्सा हैं। हालांकि, इस योजना के तहत प्रस्तावित कार्यों को पूरा होने के बाद ही उनके वास्तविक परिणामों का आकलन किया जा सकेगा।
एआई से भारत में बिजली की मांग बढ़ने का अनुमान
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुमानों के आधार पर केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2031-32 तक एआई आधारित डेटा सेंटरों से लगभग 26.3 गीगावाट अतिरिक्त बिजली मांग पैदा होने की संभावना जताई है। यह अनुमान बताता है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ बिजली क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। इस मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता के साथ पारेषण और वितरण नेटवर्क को भी मजबूत करना जरूरी होगा।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने भी डेटा सेंटरों के विस्तार और उससे जुड़ी बिजली जरूरतों को लेकर ध्यान आकर्षित किया है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में डिजिटल सेवाओं का विस्तार इस क्षेत्र की ऊर्जा मांग को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता और बिजली ग्रिड की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
हरित ऊर्जा और मजबूत ग्रिड पर रहेगा जोर
डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार के साथ कंपनियों के सामने बिजली की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने की चुनौती भी है। वहीं, ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को पूरा करते समय पर्यावरणीय प्रभाव कम करना भी महत्वपूर्ण है। इस लिहाज से सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों की भूमिका बढ़ सकती है। हालांकि, हरित ऊर्जा की उपलब्धता के साथ उसकी आपूर्ति और ग्रिड में समुचित एकीकरण की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
टाटा पावर का 2.8 गीगावाट से अधिक अवसरों वाला पोर्टफोलियो इसी बदलते बाजार में कंपनी की संभावनाओं को दर्शाता है। कंपनी की आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि इन अवसरों में से कितने ठोस परियोजनाओं और वास्तविक अनुबंधों में बदलते हैं। फिलहाल, डेटा सेंटर उद्योग में बढ़ती बिजली मांग बिजली कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा कर रही है।
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