Birsanagar Land Dispute: जमशेदपुर के बिरसानगर में जमीन विवाद गहरा गया है। हुरलुंग निवासी धर्मू सिंह भूमिज ने उपायुक्त को आवेदन सौंपा। उन्होंने पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। बताया है कि करीब 50 साल से परिवार का इस पर दखल है। अब असामाजिक तत्व जमीन कब्जाने की कोशिश में हैं। पीड़ित रैयत ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है।
Birsanagar Land Dispute: खतियान और सरकारी दस्तावेजों का दिया हवाला
आवेदन में जमीन का पूरा ब्योरा दर्ज है। यह जमीन मौजा बिरसानगर के वार्ड संख्या-17 में स्थित है। इसका खाता संख्या-55 है। प्लॉट संख्या-4183 का रकबा 0.2170 हेक्टेयर है। वहीं प्लॉट संख्या-4184 का रकबा 0.0530 हेक्टेयर है। जमीन उनके पिता स्वर्गीय शिवचरण सिंह के नाम है। बड़े चाचा स्वर्गीय लोगेन सिंह का इस पर दखल था। पिता स्वर्गीय लखन भूमिज का 1980 से दखल दर्ज है। परिवार के पास जमीन के सभी पुराने कागजात मौजूद हैं।
Birsanagar Land Dispute: पार्क और छठ घाट के नाम पर कब्जे की साजिश
धर्मू सिंह भूमिज ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका परिवार यहां लंबे समय तक खेती करता था। बाद में परिजनों ने मजदूरी का काम शुरू किया। कुछ वर्षों से जमीन का रूप बदलने की कोशिश है। जमीन को छठ घाट और पार्क बताया जा रहा है। रैयत का कहना है कि जमीन उनके पूर्वजों की है। उन्होंने किसी सार्वजनिक निर्माण के लिए जमीन नहीं दी। बिना सहमति जमीन पर दावा किया जा रहा है। भू-माफिया भोले-भाले रैयतों को डराने का प्रयास कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार का लगाया आरोप
आवेदक ने सोशल मीडिया के दावों पर आपत्ति जताई। इंटरनेट पर गलत बातें फैलाई जा रही हैं। जमीन को बाहरी लोगों से जोड़कर दिखाया जा रहा है। इससे स्थानीय रैयतों के अधिकारों पर हमला हो रहा है। पीड़ित ने 29 जनवरी 2026 को भी पत्र दिया था। उस समय भी मामले की निष्पक्ष जांच मांगी गई थी। अब दोबारा प्रशासन से जमीन बचाने की गुहार लगाई है। झूठे प्रचार से क्षेत्र का माहौल बिगड़ने की आशंका है।
अंचल और जिला प्रशासन से की निष्पक्ष जांच की मांग
रैयत ने आवेदन के साथ पुराने राजस्व दस्तावेज लगाए हैं। इसमें अंचलाधिकारी द्वारा पूर्व में सत्यापित कागजात शामिल हैं। उपायुक्त कार्यालय के प्रतिवेदन संबंधी कागजात भी जोड़े हैं। खतियान की प्रमाणित छायाप्रति भी प्रशासन को सौंपी गई है। पीड़ित ने मौके पर जाकर जांच कराने की मांग की। प्रशासन को मौके पर जाकर वस्तुस्थिति देखनी चाहिए। अवैध कब्जा करने वालों को तुरंत रोका जाना चाहिए। प्रशासनिक जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
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