केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री का पलटवार, कहा- समस्या हमारी नहीं आपकी बनाई हुई है
Berlin Piyush Goyal: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) जर्मनी दौरे पर हैं। बर्लिन में एक संवाद के दौरान यूरोपीय महिला प्रतिनिधि ने जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज एक बेहद गंभीर विषय है। इस पर पीयूष गोयल ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने तथ्यों के साथ यूरोप के दोहरे रवैये को उजागर किया। केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा कि भारत अब निराधार उपदेश नहीं सुनता। हमारा देश अब हर मंच पर आंकड़ों से बात करता है।
Berlin Piyush Goyal: 17% आबादी वाले भारत का उत्सर्जन 3% से कम
पीयूष गोयल ने दोनों क्षेत्रों के आबादी और प्रदूषण के आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया की 17 फीसदी आबादी को संभालता है। इसके बावजूद कार्बन उत्सर्जन में हमारा योगदान 3 फीसदी से कम है। वहीं यूरोप में दुनिया की केवल 3-4% आबादी रहती है। लेकिन कार्बन उत्सर्जन में यूरोप का योगदान 18 फीसदी रहा है। यह हिस्सेदारी वैश्विक स्तर पर बहुत विशाल है। गोयल ने तीखा सवाल पूछा कि ओजोन परत को नुकसान किसने पहुंचाया। वातावरण में यह सारा कार्बन किसने भेजा।
Berlin Piyush Goyal: यह संकट आपके कारण ही पैदा हुआ है
केंद्रीय मंत्री ने यूरोपीय प्रतिनिधियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह पूरी समस्या आपके कारण पैदा हुई। इस गड़बड़ी के लिए सबसे पहले आप ही जिम्मेदार हैं। भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन यूरोप के 10-15% से कम है। वहीं यूरोप का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन भारत से कहीं ज्यादा है। यूरोपीय नागरिक का पर्यावरणीय प्रभाव भारत से आठ गुना अधिक है। इसके बाद भी पश्चिमी देश विकासशील देशों पर सवाल उठाते हैं। गोयल ने कहा कि भारत अब ऐसे दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं करेगा।
140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा और सुरक्षा जरूरतें सर्वोपरि
गोयल ने भारत की जिम्मेदारियों और प्राथमिकताओं को सामने रखा। वह दुनिया की 17% आबादी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्हें 140 करोड़ यानी 1.4 अरब लोगों की जरूरतें पूरी करनी हैं। देशवासियों की ऊर्जा जरूरतें पूरी करना सरकार का मुख्य कर्तव्य है। इसके साथ ही जनता की भोजन की आवश्यकताएं सुनिश्चित करनी हैं। देश को पूरी तरह सुरक्षित रखना भी अनिवार्य है। इतनी बड़ी जिम्मेदारियों के बाद भी भारत पर्यावरण को लेकर सजग है।
सर्कुलर इकोनॉमी और स्वच्छ ऊर्जा में दुनिया में सबसे आगे
केंद्रीय मंत्री ने भारत की पर्यावरण नीतियों की मजबूती बताई। उन्होंने कहा कि हम कचरे के निस्तारण को लेकर बेहद सतर्क हैं। भारत सर्कुलर इकोनॉमी यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था पर काम कर रहा है। संसाधनों का सही उपयोग और संरक्षण हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इन सभी चुनौतियों के बावजूद भारत ने मिसाल कायम की है। हमारे पास दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रम है। हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। भारत ने दिखा दिया कि विकास और पर्यावरण साथ चल सकते हैं।
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