92.97 करोड़ की परियोजना से ग्रिड को मिलेगी नौ मेगावाट बिजली, निर्माण कार्य शुरू
Palamu News: झारखंड के पलामू जिले में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी परियोजना पर काम शुरू हो गया है। हैदरनगर प्रखंड के परता गांव में सोलर पावर प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 92.97 करोड़ रुपये है। संयंत्र के निर्माण के लिए 12 महीने की समयसीमा तय की गई है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां उत्पादित बिजली को ग्रिड से जोड़ने की योजना है। टेंडर के अनुसार, संयंत्र की निर्धारित क्षमता नौ मेगावाट एसी होगी।
Palamu News: पूजा-अर्चना के साथ निर्माण कार्य का शुभारंभ
परता गांव में सोमवार को निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। पंचायत समिति सदस्य गुप्तेश्वर पांडेय ने विधिवत पूजा-अर्चना की और नारियल फोड़कर काम का शुभारंभ किया। यह परियोजना झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (जेआरईडीए) के तहत संचालित की जा रही है। इसके माध्यम से क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। निर्माण पूरा होने और संयंत्र के चालू होने के बाद ही बिजली उत्पादन शुरू हो सकेगा।
Palamu News: 20 मेगावाट डीसी और नौ मेगावाट एसी क्षमता का अंतर
परियोजना में सोलर पैनलों की क्षमता 20 मेगावाट डीसी बताई गई है, जबकि टेंडर में संयंत्र की क्षमता नौ मेगावाट एसी दर्ज है। डीसी का अर्थ प्रत्यक्ष धारा और एसी का अर्थ प्रत्यावर्ती धारा है। सोलर पैनल सूर्य की रोशनी से डीसी बिजली पैदा करते हैं। इसके बाद इन्वर्टर के जरिए इसे एसी में बदला जाता है, ताकि बिजली को ग्रिड से जोड़ा जा सके। इसलिए पैनलों की डीसी क्षमता और ग्रिड में बिजली देने की एसी क्षमता अलग-अलग हो सकती है। इस परियोजना में ग्रिड को बिजली देने की निर्धारित क्षमता नौ मेगावाट एसी है।
50 एकड़ जमीन पर तैयार होगा संयंत्र
राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए परता गांव में 50 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है। जेआरईडीए के निविदा दस्तावेजों में इस स्थान पर नौ मेगावाट एसी क्षमता का ग्रिड से जुड़ा सोलर पावर प्लांट स्थापित करने का उल्लेख है। परियोजना के लिए जारी तकनीकी दस्तावेज में सोलर पैनलों की अनुमानित क्षमता 10.8 मेगावाट पीक डीसी और ग्रिड से आपूर्ति की क्षमता नौ मेगावाट एसी बताई गई है। इसलिए डीसी क्षमता के संबंध में अलग-अलग आंकड़ों का उल्लेख करने से पहले संबंधित नवीनतम स्वीकृत दस्तावेजों का मिलान जरूरी है।
निर्माण से लेकर रखरखाव तक की जिम्मेदारी
परियोजना में केवल सोलर पैनल लगाने का काम ही शामिल नहीं है। इसके तहत डिजाइन तैयार करने, इंजीनियरिंग, उपकरणों की खरीद और आपूर्ति, निर्माण, स्थापना, परीक्षण तथा संयंत्र को चालू करने जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। निविदा के अनुसार, निर्माण पूरा करने के लिए 12 महीने की अवधि निर्धारित है। संयंत्र चालू होने के बाद चयनित एजेंसी को 25 वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
परियोजना की लागत 92.97 करोड़ रुपये
इस सोलर पावर प्लांट की अनुमानित लागत 81.74 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि करों सहित कुल परियोजना लागत 92.97 करोड़ रुपये है। इस राशि के तहत निर्धारित कार्यों को पूरा कर संयंत्र को बिजली उत्पादन के लिए तैयार किया जाना है। निर्माण पूरा होने के बाद बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। निविदा दस्तावेज में बिजली निकासी के लिए देवड़ी स्थित 33/11 केवी सबस्टेशन का उल्लेख है, जो परियोजना स्थल से लगभग पांच से सात किलोमीटर की दूरी पर बताया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए टीम तैनात
निर्माण स्थल की सुरक्षा की जिम्मेदारी यूजीएस सिक्योरिटी सर्विसेज एलएलपी को सौंपी गई है। कंपनी के सीनियर मैनेजर अभय राज यादव और एडमिन विभाग प्रमुख अजय त्रिपाठी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे। सुरक्षा टीम में इंद्रजीत पांडेय को हेड गार्ड बनाया गया है। वहीं, लाल मुनि तिवारी, रमेश पांडेय और प्रणय पांडेय को सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्त किया गया है। निर्माण के दौरान स्थल पर मौजूद उपकरणों और अन्य संसाधनों की सुरक्षा इस टीम की जिम्मेदारी होगी।
स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
परता गांव में इस परियोजना का निर्माण क्षेत्र में ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सौर ऊर्जा उत्पादन से बिजली के लिए पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, संयंत्र से वास्तविक उत्पादन कितना होगा, यह धूप की उपलब्धता, मौसम, उपकरणों की कार्यक्षमता और संचालन पर निर्भर करेगा। फिलहाल निर्माण कार्य शुरू होने के बाद परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करना अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।


