निरसा के ईसीएल आउटसोर्सिंग क्षेत्र में सीआईएसएफ की कार्रवाई, कोयले की ढुलाई और अनुमति को लेकर उठे सवाल
Dhanbad News: धनबाद जिले के निरसा स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के चापापुर आउटसोर्सिंग क्षेत्र में रविवार देर शाम केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने कार्रवाई करते हुए कोयला लदे चार हाइवा जब्त किए। शीतलपुर सीआईएसएफ की टीम ने गुप्त सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर वाहनों को कब्जे में लिया। इसके बाद चारों हाइवा को थाने पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि इन वाहनों के जरिए पिछले कई दिनों से कोयले की ढुलाई की जा रही थी। कार्रवाई के बाद अब आउटसोर्सिंग क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश और कोयले के परिवहन की अनुमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि जब्त हाइवा में कितनी मात्रा में कोयला लदा था। वाहनों के प्रवेश से जुड़े रिकॉर्ड और कोयले की ढुलाई के दस्तावेजों की स्थिति भी सामने आना बाकी है। जांच में इन तथ्यों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। इससे पता चल सकेगा कि वाहनों को नियमानुसार प्रवेश मिला था या नहीं और कोयले का परिवहन निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जा रहा था या नहीं।
Dhanbad News: कई दिनों से हो रही थी कोयले की ढुलाई
मिली जानकारी के अनुसार, चापापुर आउटसोर्सिंग क्षेत्र से पिछले कई दिनों से 10 चक्का हाइवा के जरिए कोयले की ढुलाई की जा रही थी। इसी दौरान सीआईएसएफ को इस गतिविधि के संबंध में गुप्त सूचना मिली। सूचना के आधार पर टीम ने रविवार देर शाम कार्रवाई की और कोयला लदे चारों वाहनों को जब्त कर लिया।
इस कार्रवाई के बाद कोयले के स्रोत और उसके गंतव्य को लेकर भी जानकारी जुटाना जरूरी है। जांच में यह पता लगाना होगा कि कोयला किस स्थान से लोड किया गया था और उसे कहां ले जाया जा रहा था। साथ ही, वाहनों के पास परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे या नहीं, इसकी भी जांच की जानी है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
Dhanbad News: बिना अनुमति प्रवेश को लेकर ईसीएल अधिकारी ने उठाए सवाल
ईसीएल अधिकारी अजय कुमार झा ने आउटसोर्सिंग क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि इन वाहनों को आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी, तो उनका परिसर में प्रवेश करना गंभीर मामला है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में मिलीभगत की आशंका भी जताई है।
ऐसे में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि चारों हाइवा को परिसर में प्रवेश किस आधार पर मिला। क्या वाहनों को प्रवेश देने से पहले आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई थी? क्या कोयले की ढुलाई के लिए संबंधित स्तर से अनुमति दी गई थी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
फिलहाल, मिलीभगत की आशंका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इस मामले में किसी व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका को जांच से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
आउटसोर्सिंग कंपनी के मैनेजर के नाम की भी चर्चा
इस प्रकरण में आउटसोर्सिंग कंपनी के एक मैनेजर का नाम भी सूत्रों के हवाले से चर्चा में आया है। हालांकि, उनकी भूमिका को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित मैनेजर को वाहनों के प्रवेश या कोयले की ढुलाई के बारे में जानकारी थी या नहीं।
जांच के दौरान कंपनी के प्रवेश रिकॉर्ड, वाहनों से संबंधित दस्तावेज और कोयले की ढुलाई की अनुमति की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। इन रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जा सकेगा कि वाहनों को किसकी अनुमति से परिसर में प्रवेश मिला था। यदि किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।
कोयले की वैधता और परिवहन दस्तावेजों की जांच जरूरी
चार हाइवा जब्त किए जाने के बाद अब कोयले की वैधता और उसकी ढुलाई से जुड़े दस्तावेज जांच के प्रमुख बिंदु हैं। कोयले की मात्रा, उसके स्रोत और गंतव्य की जानकारी का सत्यापन भी जरूरी है। इसके साथ ही यह देखना होगा कि वाहनों के प्रवेश और आवाजाही से संबंधित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
चापापुर आउटसोर्सिंग क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई ने कोयले की ढुलाई और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कोयले का परिवहन अवैध था या इसमें किसी की मिलीभगत थी। इन पहलुओं की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल, चारों हाइवा की जब्ती के बाद मामले में आगे की जांच का इंतजार है। वाहनों के दस्तावेजों, प्रवेश अनुमति और कोयले से संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
Read also: Jamshedpur News: बिरसानगर में जुआ अड्डे पर छापा, 15 पकड़े गए


