Ranchi News: जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुई सुनवाई, प्रार्थियों ने सौंपे दस्तावेज
Ranchi News: राजधानी रांची में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा वर्ष 2016 में आयोजित स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। झारखंड हाईकोर्ट के पुराने भवन में वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन के अध्यक्ष सह सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की अदालत ने इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई पूरी कर ली है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कमीशन ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
Ranchi News: जेएसएससी और राज्य सरकार द्वारा जवाब न दाखिल करने पर जताई असंतुष्टि
सुनवाई के दौरान कमीशन ने पाया कि मामले में पूर्व में जेएसएससी और राज्य सरकार से कुछ विशिष्ट आपत्तियों पर जवाब मांगा गया था, जिसे निर्धारित समय के भीतर दाखिल नहीं किया जा सका। इस पर कमीशन ने अपनी गहरी असंतुष्टि जताई है। वहीं दूसरी ओर, मामले के प्रार्थियों (अभ्यर्थियों) की ओर से कमीशन द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज और विवरण समय पर प्रस्तुत कर दिए गए।
कमीशन ने 2 अगस्त 2022 के बाद नियुक्त हुए अभ्यर्थियों से अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रार्थियों को कोटिवार और विषयवार अपने अंकों का विवरण एक निश्चित फॉर्मेट में जमा करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता, अधिवक्ता राजेश कुमार, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अन्य वकीलों ने अदालत के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा।
Ranchi News: हाईकोर्ट के निर्देश पर बढ़ाई गई है समय सीमा
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मीना कुमारी एवं अन्य की लगभग 257 याचिकाओं पर एक अहम फैसला सुनाते हुए वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन को तीन महीने के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। हालांकि, निर्धारित समय सीमा पूरी हो जाने के कारण न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस समयावधि को 3 महीने के लिए और विस्तारित कर दिया है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के सख्त आदेश के अनुपालन में वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन द्वारा हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में बरती गई अनियमितताओं और गड़बड़ियों की गहन जांच की जा रही है। जेएसएससी द्वारा वर्ष 2016 में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के कुल 17,786 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें से अब तक करीब 10,000 पदों पर ही नियुक्तियां हो पाई हैं और शेष पद रिक्त पड़े हुए हैं।
यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया जिलावार और स्टेट वाइज (राज्य स्तर पर) दो अलग-अलग मेरिट लिस्ट के आधार पर संचालित की गई थी। एक ही विज्ञापन और परीक्षा के अंतर्गत दो तरह की मेरिट लिस्ट तैयार किए जाने के कारण हजारों योग्य और मेधावी अभ्यर्थी नियुक्ति पाने से वंचित रह गए थे, जिस पर लगातार कानूनी प्रक्रिया जारी है
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