Rail Yatri Sangharsh Samiti Vs Tatanagar Railway : टाटानगर रेलवे (Tatanagar Railway) स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाओं और ट्रेनों (Train) के परिचालन को लेकर गहराता विवाद अब और तेज हो गया है। सोमवार को रेल यात्री संघर्ष समिति ने रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि विभाग जमीनी समस्याओं को सुलझाने के बजाय भ्रामक प्रचार का सहारा ले रहा है। समिति का दावा है कि रेलवे द्वारा हाल ही में जारी किए गए कुछ संदिग्ध वीडियो वास्तविकता से कोसों दूर हैं और इनका उद्देश्य केवल यात्रियों की मूल समस्याओं से ध्यान भटकाना है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर समिति के सदस्यों ने जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के साथ बैठक कर भावी आंदोलन की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
वीडियो की विश्वसनीयता पर उठे गंभीर सवाल
समिति के संयोजक शिवशंकर सिंह के नेतृत्व में सुबोध श्रीवास्तव और अजय कुमार ने संयुक्त बयान जारी कर रेलवे द्वारा जारी किए गए वीडियो की प्रमाणिकता को चुनौती दी है। समिति का कहना है कि इन वीडियो में न तो समय का कोई स्पष्ट उल्लेख है और न ही यात्रियों की पहचान या संबंधित ट्रेन और रूट की जानकारी दी गई है। बिना किसी ठोस संदर्भ के ऐसे अस्पष्ट वीडियो सार्वजनिक करना रेलवे की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। समिति ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रशासन को प्रोपेगंडा फैलाने के बजाय यात्रियों को हो रही वास्तविक तकलीफों का जवाब देना चाहिए।
ट्रेनों की लेटलतीफी व अव्यवस्था से यात्री बेहाल
टाटानगर और आसपास के रेलखंडों पर यात्री सुविधाओं की बदहाली को लेकर समिति ने गहरी चिंता व्यक्त की है। लंबे समय से ट्रेनों की लेटलतीफी और अनियमित परिचालन एक स्थायी समस्या बन चुकी है। कई महत्वपूर्ण ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं, जिसका सीधा असर रोजमर्रा के कामगारों, विद्यार्थियों, गंभीर मरीजों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। समिति के अनुसार, बार-बार शिकायत के बावजूद रेलवे प्रशासन की ओर से व्यवस्था में सुधार के लिए कोई भी प्रभावी या ठोस पहल नजर नहीं आ रही है, जिससे आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सरयू राय के साथ बनी रणनीति, उग्र आंदोलन की चेतावनी
विधायक सरयू राय के आवास पर हुई बैठक के दौरान समिति ने स्पष्ट किया कि अब केवल पत्राचार से काम नहीं चलेगा। पदाधिकारियों ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि रेलवे प्रशासन ने जल्द ही ट्रेनों की समयबद्धता (Punctuality) सुनिश्चित नहीं की और यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं, तो संघर्ष को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। समिति का मानना है कि रेलवे का यह रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिक के अधिकारों का हनन है और इसके खिलाफ सड़कों पर उतरना अब अनिवार्य हो गया है।
प्रचार छोड़ जमीनी स्तर पर सुधार की अपील
अंत में, रेल यात्री संघर्ष समिति ने रेलवे प्रशासन से अपील की है कि वह सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर दिखावटी प्रचार बंद करे। प्रशासन को चाहिए कि वह जमीनी स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए और ट्रेनों के परिचालन को समयबद्ध करे। समिति ने जोर देकर कहा कि बेहतर सुविधाएं और पारदर्शी संवाद ही वह एकमात्र रास्ता है, जिससे आम जनता का भरोसा रेलवे पर दोबारा कायम हो सकता है। यदि सुधार की दिशा में तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में रेलवे को बड़े जन-आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।
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