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Jharkhand Tree Cutting Case : लॉकडाउन में पेड़ कटाई पर हाई कोर्ट सख्त, दो हफ्ते में मांगी विस्तृत रिपोर्ट | Jharkhand High Court

• छह साल से लंबित जांच पर अदालत की नाराजगी

Jharkhand Tree Cutting Case : कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान वर्ष 2020 में झारखंड के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर हुई पेड़ों की कटाई के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई और राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में हुई, जहां अदालत के आदेश पर एडीजी सीआईडी और जांच अधिकारी डीएसपी सीआईडी सशरीर उपस्थित हुए।

वन विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता उजागर

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जांच में वन विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। इनमें रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, रेंजर, वन गार्ड समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। सरकार ने यह भी जानकारी दी कि इस मामले में दो वन अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है, जबकि एक अधिकारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।

पलामू में दर्ज दो एफआईआर, सीआईडी कर रही जांच

अदालत को बताया गया कि पलामू जिले में इस प्रकरण से संबंधित दो प्राथमिकी दर्ज की गई थीं, जिनकी जांच वर्तमान में सीआईडी द्वारा की जा रही है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच एजेंसियों को सक्रिय और प्रभावी तरीके से काम करना होगा।

छह वर्षों की देरी गंभीर, अवमानना की स्थिति संभव : हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने जांच में छह वर्षों की देरी को गंभीर बताते हुए कहा कि यह स्थिति अवमानना की श्रेणी में आ सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पिछली सुनवाई में पीसीसीएफ और डीजीपी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं था। दस्तावेजों के अभाव का हवाला दिए जाने पर भी अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि सीआईडी को केवल दस्तावेज मांगने के बजाय सक्रियता दिखानी चाहिए।

200 ट्रकों में ढोए गए थे पेड़, कई जिलों में हुई थी कटाई

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 के लॉकडाउन के दौरान जामताड़ा, पलामू, चाईबासा और रांची समेत कई जिलों में सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी। बताया जाता है कि इन पेड़ों को 200 से अधिक ट्रकों में भरकर ले जाया गया था। बाद में इस पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच सीआईडी को सौंपी गई थी।

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