बालू के अवैध उठाव और खनिजों की ढुलाई पर रहेगी नजर, हर महीने होगी कार्रवाई की समीक्षा
Jharkhand Mining: झारखंड में बालू समेत अन्य खनिजों के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए खान विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों से अवैध खनन की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही, की गई कार्रवाई का ब्योरा हर महीने विभाग को भेजना होगा। इस पहल का उद्देश्य अवैध खनिज कारोबार पर लगाम लगाना, सरकारी राजस्व की सुरक्षा करना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकना है।
Jharkhand Mining: शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट पर भी होगी कार्रवाई
खान विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन से जुड़ी शिकायतों को केवल औपचारिकता पूरी करने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जिला प्रशासन और पुलिस को आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई करनी होगी। विभाग को लगातार अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थीं। मीडिया में भी इस तरह की घटनाओं की खबरें सामने आ रही थीं। इसके बाद अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने और शिकायतों का गंभीरता से निपटारा करने का निर्देश दिया गया है।
अखबारों में प्रकाशित अवैध खनन से संबंधित खबरों पर भी प्रशासन को ध्यान देना होगा। खास तौर पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के तहत बालू उठाव पर रोक की अवधि में होने वाली गतिविधियों की जांच करने को कहा गया है। यदि इस दौरान अवैध खनन या बालू की ढुलाई की जानकारी मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। कार्रवाई के बाद उसकी रिपोर्ट विभाग को भेजना भी अनिवार्य होगा।
Jharkhand Mining: उपायुक्त की अध्यक्षता में हर महीने होगी टास्क फोर्स की बैठक
अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए प्रत्येक जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स को सक्रिय रहना होगा। इसकी बैठक हर महीने आयोजित की जाएगी। बैठक में पुलिस, खनन, परिवहन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में अवैध खनन और खनिजों की गैरकानूनी आवाजाही पर नजर रखने को कहा गया है।
खान विभाग के मुख्यालय से मिलने वाली शिकायतों की सूची भी तैयार करनी होगी। इसके बाद गंभीरता और प्राथमिकता के आधार पर मामलों का निपटारा करना होगा। विभाग को हर महीने कार्रवाई की रिपोर्ट भेजनी होगी। इससे यह पता चल सकेगा कि शिकायतों पर कितनी कार्रवाई हुई और किन मामलों में आगे जांच की जरूरत है।
अवैध परिवहन रोकने के लिए बनेंगे छापेमारी दल
खनिजों की अवैध ढुलाई और भंडारण रोकने के लिए जिलों में क्षेत्रवार छापेमारी और गश्ती दल बनाए जाएंगे। इन दलों को संवेदनशील इलाकों में निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी। संदिग्ध वाहनों की जांच की जाएगी। खनिजों के परिवहन से संबंधित जरूरी कागजात और चालान भी देखे जाएंगे।
अवैध खनन या परिवहन में किसी व्यक्ति, वाहन मालिक अथवा संस्था की संलिप्तता सामने आने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। छापेमारी दलों के कामकाज की भी हर महीने समीक्षा होगी। इस व्यवस्था का मकसद केवल शिकायत मिलने पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नियमित निगरानी के जरिए अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना है।
बालू घाटों पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे, बनेंगे चेकनाके
बालू घाटों से होने वाले उठाव और परिवहन पर निगरानी बढ़ाने के लिए जरूरत के अनुसार सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। संवेदनशील रास्तों पर चेकनाके भी बनाए जाएंगे। इससे बालू लेकर आने-जाने वाले वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। जांच के दौरान परिवहन संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जा सकेगा।
विभाग ने बालू घाटों की नीलामी में सफल बोलीदाताओं की जिम्मेदारी भी तय की है। घाट संचालकों को अपने क्षेत्र में अवैध खनन या गैरकानूनी ढुलाई की जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन को सूचित करना होगा। इस तरह निगरानी की जिम्मेदारी केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगी। घाटों के संचालन से जुड़े लोगों को भी नियमों के पालन में सहयोग करना होगा।
पर्यावरण संरक्षण और सरकारी राजस्व बढ़ाने पर जोर
खान विभाग ने बालू खनन के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जारी वर्ष 2016 के सतत बालू खनन प्रबंधन दिशा-निर्देशों और वर्ष 2020 के प्रवर्तन एवं निगरानी दिशा-निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया है। इन दिशा-निर्देशों में खनन क्षेत्रों की निगरानी, परिवहन व्यवस्था और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जैसे प्रावधान शामिल हैं।
नदी से निर्धारित सीमा से अधिक बालू निकालने और नियमों के विरुद्ध खनन करने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर भी असर पड़ता है। अवैध कारोबार के कारण सरकार को मिलने वाले राजस्व का नुकसान भी होता है।
ऐसे में खान विभाग की नई पहल के तहत जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है। अब निगरानी, नियमित छापेमारी और मासिक समीक्षा के जरिए अवैध खनन पर रोक लगाने की कोशिश होगी। इस व्यवस्था का वास्तविक असर जिलों में निर्देशों के पालन और कार्रवाई की निरंतरता पर निर्भर करेगा।


