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Odia Opera: जामटुटी में ओड़िआ ओपेरा की धूम, सन्नी उरांव ने किया उद्घाटन

 मां लक्ष्मी पूजा पर सजा सांस्कृतिक मंच

Odia Opera: पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड स्थित जामटुटी गांव में मां लक्ष्मी पूजा के अवसर पर ओड़िआ ओपेरा नाटक का आयोजन किया गया। शनिवार, 31 अक्टूबर को आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के गांवों के दर्शक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन चक्रधरपुर नगर परिषद अध्यक्ष सन्नी उरांव ने फीता काटकर किया। इस दौरान गांव में उत्सव और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल रहा।

Odia Opera: ओडिशा की नाट्य मंडली ने पेश किया शानदार मंचन

कार्यक्रम में ओडिशा के बालेश्वर से पहुंची प्रसिद्ध नाट्य मंडली ‘ओम श्री सातशंख’ के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। कलाकारों ने ओड़िआ ओपेरा के पारंपरिक अंदाज में नाटक का मंचन किया। उनकी अभिनय शैली और मंच प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा। नाटक देखने के लिए जामटुटी के अलावा आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे थे।

ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। मां लक्ष्मी पूजा के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय कला और संस्कृति को भी मंच प्रदान किया। नाट्य मंडली के कलाकारों की प्रस्तुति कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही।

Odia Opera: भाषा और संस्कृति को बचाने पर जोर

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए नगर परिषद अध्यक्ष सन्नी उरांव ने कहा कि मां लक्ष्मी पूजा के अवसर पर आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बनना उनके लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि चक्रधरपुर और आसपास के इलाकों में ओड़िआ भाषा, बोली और परंपराओं की पुरानी विरासत रही है। यहां की सांस्कृतिक पहचान में इन परंपराओं का विशेष स्थान है।

उन्होंने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति को सुरक्षित रखना केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए पूरे समाज को आगे आना होगा। खासकर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए गांव और पंचायत स्तर पर ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पारंपरिक नाट्य विधाओं को बढ़ावा देने की अपील

सन्नी उरांव ने कहा कि ओड़िआ ओपेरा जैसी पारंपरिक नाट्य विधाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं। इनके माध्यम से भाषा, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को भी अभिव्यक्ति मिलती है। मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए पुरानी पीढ़ी की सांस्कृतिक धरोहर नई पीढ़ी तक पहुंचती है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ मनोरंजन के साधन बदल रहे हैं। इसके बावजूद पारंपरिक कला और नाट्य विधाओं का महत्व कम नहीं हुआ है। इन्हें जीवित रखने के लिए स्थानीय स्तर पर लगातार प्रयास करने की जरूरत है। ऐसे आयोजनों से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। साथ ही ग्रामीणों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का मौका भी मिलता है।

नगर परिषद अध्यक्ष ने आयोजन समिति और जामटुटी के ग्रामीणों की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से होने चाहिए। समाज के सभी वर्गों को इनके आयोजन और प्रोत्साहन में सहयोग करना चाहिए।

चक्रधरपुर क्षेत्र में ओड़िआ संस्कृति की पुरानी पहचान

चक्रधरपुर और पश्चिमी सिंहभूम का क्षेत्र भाषाई तथा सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। यहां अलग-अलग समुदायों की भाषा, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक गतिविधियां सामाजिक जीवन का हिस्सा हैं। ओड़िआ भाषा और संस्कृति का भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव रहा है।

ओड़िशा की पारंपरिक रंगमंच शैली में ओपेरा और जात्रा का विशेष स्थान है। इसमें अभिनय के साथ संवाद, संगीत और नाटकीय प्रस्तुति को महत्व दिया जाता है। पारंपरिक मंचन आम दर्शकों तक सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों को पहुंचाने का माध्यम भी रहा है। ऐसे में जामटुटी जैसे ग्रामीण इलाकों में ओड़िआ ओपेरा का आयोजन स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा सकता है।

कई गणमान्य लोग और ग्रामीण रहे मौजूद

कार्यक्रम में पिछड़ी मोर्चा के जिलाध्यक्ष जय जगन्नाथ प्रधान, हथिया पंचायत के पूर्व मुखिया कुंवार सिंह सरदार और अमर बोदरा उपस्थित रहे। इनके अलावा स्थानीय मुंडा, आयोजन समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

स्थानीय लोगों की भागीदारी ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बनाया। मां लक्ष्मी पूजा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रमुखता दी। आयोजन के जरिए ग्रामीणों को ओड़िआ नाट्य परंपरा से जुड़ने और कलाकारों की प्रस्तुति देखने का अवसर मिला। आयोजकों और ग्रामीणों की भागीदारी ने यह संदेश भी दिया कि स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सामुदायिक प्रयासों की अहम भूमिका है।

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