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Canara Bank Robbery: गोलमुरी बैंक लूटकांड में अब तक खाली हाथ पुलिस, 23.80 किलो सोने का सुराग नहीं

एक महीने बाद भी नहीं सुलझी 33 करोड़ की बैंक डकैती

Canara Bank Robbery: जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित केनरा बैंक में हुई करोड़ों रुपये की डकैती को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है। इसके बावजूद मामले में पुलिस को अब तक ऐसी सफलता नहीं मिली है, जिससे लूटे गए सोने और नकदी की बरामदगी हो सके। 24 सितंबर 2026 को हुई इस वारदात में अपराधी करीब 23.80 किलोग्राम सोना और लगभग 42 से 43 लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए थे। लूटे गए सामान की कुल कीमत अलग-अलग शुरुआती आकलनों में करीब 33.60 करोड़ से 36 करोड़ रुपये तक बताई गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए 20 सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई थी। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इनाम की घोषणा भी की। इसके बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी या बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

Canara Bank Robbery की जांच में एसआईटी जुटी

गोलमुरी थाना क्षेत्र की इस बड़ी डकैती की जांच के लिए पुलिस ने 20 सदस्यीय एसआईटी बनाई थी। टीम का नेतृत्व सिटी एसपी ललित मीणा कर रहे हैं। जांच में तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अपराधियों की संभावित आवाजाही के रास्तों को खंगालने पर जोर दिया गया। पुलिस की टीमें बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य संभावित ठिकानों तक पहुंचीं। अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की खबरें भी सामने आईं।

इस मामले में पुलिस की चुनौती केवल आरोपियों तक पहुंचना नहीं है। लूटे गए सोने और नकदी का पता लगाना भी जांच का अहम हिस्सा है। इतनी बड़ी मात्रा में गिरवी रखा सोना बैंक से बाहर ले जाना और फिर उसे छिपाना या खपाने की कोशिश करना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण पहलू है। हालांकि, पुलिस ने अब तक बरामदगी को लेकर कोई आधिकारिक सफलता घोषित नहीं की है।

Canara Bank Robbery: पांच हथियारबंद अपराधियों ने बैंक को बनाया था निशाना

घटना 24 सितंबर 2026 की सुबह की है। गोलमुरी मस्जिद रोड स्थित केनरा बैंक की शाखा खुलने के कुछ ही देर बाद पांच हथियारबंद अपराधी वहां पहुंचे थे। सभी ने रेनकोट पहन रखा था। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, अपराधी सुबह करीब 9:10 बजे बैंक में दाखिल हुए थे। उन्होंने सबसे पहले सुरक्षा गार्ड को निशाना बनाया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई। इसके बाद बैंक कर्मचारियों और मौजूद लोगों को हथियार के बल पर अपने नियंत्रण में ले लिया।

बैंककर्मियों को बंधक बनाकर स्ट्रांग रूम से लूटा था सोना

अपराधियों ने बैंक के कर्मचारियों को धमकाकर स्ट्रांग रूम और गोल्ड सेफ तक पहुंच बनाई। इसके बाद वहां रखे सोने के आभूषण और नकदी अपने कब्जे में ले लिए। शुरुआती बैंक विवरण के अनुसार, करीब 23.80 किलोग्राम गिरवी रखा सोना और लगभग 40 से 43 लाख रुपये नकद लूटे गए थे। बैंक में रखा सोना गोल्ड लोन के एवज में ग्राहकों ने गिरवी रखा था। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 650 पैकेटों में रखे आभूषणों का भी उल्लेख किया गया था।

वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी दो मोटरसाइकिलों से फरार हो गए थे। घटना के बाद बैंक परिसर और आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। पुलिस ने अपराधियों के भागने के संभावित रास्तों का पता लगाने की कोशिश की। इस घटना ने शहर की बैंक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे।

पुलिस ने पांच संदिग्धों की पहचान कर तस्वीरें जारी कीं

जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पांच संदिग्धों की पहचान करने की दिशा में कार्रवाई की। इनमें तीन संदिग्धों के नाम भी सार्वजनिक रिपोर्टों में सामने आए। इनमें बिहार के समस्तीपुर निवासी प्रियदर्शी उर्फ दर्शन कुमार, पटना निवासी अक्षय कुमार उर्फ सका और पश्चिम बंगाल के रानीगंज निवासी अमन सिंह शामिल हैं। पुलिस ने उनकी तस्वीरें जारी कर लोगों से सूचना देने की अपील की थी।

फरार आरोपियों पर घोषित हुआ 10 लाख रुपये का इनाम

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने इनाम की घोषणा भी की। शुरुआत में तीन संदिग्धों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बाद में दो अन्य संदिग्धों को भी इस सूची में शामिल किया गया। इस तरह पांचों पर कुल 10 लाख रुपये का इनाम घोषित होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने लोगों से आरोपियों के ठिकाने और गतिविधियों के बारे में सूचना देने की अपील की थी। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की बात भी कही गई थी।

बिहार, बंगाल और ओडिशा तक पहुंची पुलिस की जांच

वारदात के बाद पुलिस ने जांच का दायरा जमशेदपुर से बाहर भी बढ़ाया। बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई। 30 सितंबर की रिपोर्टों में ओडिशा के मयूरभंज और रायरंगपुर इलाके में पुलिस की कार्रवाई का उल्लेख किया गया था। जांच के दौरान अपराधियों के संभावित भागने के रास्तों और संपर्कों की पड़ताल की गई। कुछ रिपोर्टों में चतरा से संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि, इन कार्रवाइयों से लूटे गए सोने की बरामदगी या मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई।

एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब के सामने बड़ी चुनौती

इस मामले में जमशेदपुर पुलिस के सामने दोहरी चुनौती है। पहली, वारदात में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार करना। दूसरी, करोड़ों रुपये मूल्य के सोने और नकदी की बरामदगी सुनिश्चित करना। एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब के नेतृत्व में जिला पुलिस की कार्रवाई पर भी शहरवासियों की नजर है।

एक अक्टूबर को झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने जमशेदपुर पहुंचकर केनरा बैंक डकैती सहित अन्य आपराधिक घटनाओं की समीक्षा की थी। इस बैठक में पुलिस अधिकारियों को मामलों की जांच में तेजी लाने और अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इससे स्पष्ट है कि मामला पुलिस मुख्यालय के स्तर पर भी गंभीरता से लिया गया था।

एक महीने बाद भी बरकरार हैं कई सवाल

24 सितंबर से 31 अक्टूबर तक 37 दिन बीत चुके हैं। इतने समय बाद भी मामले में गिरफ्तारी और बरामदगी की आधिकारिक सफलता सामने नहीं आने से जांच की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं। 20 सदस्यीय एसआईटी के गठन, अलग-अलग राज्यों में छापेमारी और इनाम की घोषणा के बावजूद नतीजे का इंतजार है।

हालांकि, किसी बड़ी आपराधिक वारदात की जांच में तकनीकी साक्ष्य जुटाने और आरोपियों तक पहुंचने में समय लग सकता है। लेकिन इस मामले में लूटी गई संपत्ति की भारी कीमत और घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पर जल्द नतीजे देने का दबाव स्वाभाविक है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 23.80 किलो सोना कहां है? पांचों संदिग्ध किस ठिकाने पर छिपे हैं? क्या लूटे गए सोने को कहीं खपाने की कोशिश की गई है? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच से ही सामने आएंगे।

फिलहाल गोलमुरी केनरा बैंक डकैती कांड का खुलासा और लूटी गई संपत्ति की बरामदगी जमशेदपुर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। शहर के लोग अब इस मामले में ठोस कार्रवाई और पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

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