Bokaro SP in Controversy : झारखंड पुलिस के भीतर इन दिनों आंतरिक कलह की स्थिति बनी हुई है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरविंदर सिंह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। एसोसिएशन ने बोकारो के पिंड्राजोरा थाना कांड में एक साथ 28 पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के निलंबन को दुर्भाग्यपूर्ण और एकपक्षीय कार्रवाई करार दिया है।
अपनी विफलता छुपा रहे हैं एसपी: राहुल कुमार मुर्मू
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पिंड्राजोरा मामले की सही समय पर समीक्षा करने और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने में बोकारो एसपी पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में पुलिस नियंत्रण का अभाव है। मुर्मू के अनुसार, एसपी ने अपनी प्रशासनिक विफलता को ढकने के लिए एक ही थाने के 28 कर्मियों को निलंबित कर दिया है, जो न्यायसंगत नहीं है। अध्यक्ष ने आगे चेतावनी दी है कि एसोसिएशन अपने सदस्यों को न्याय दिलाने के लिए सरकार और सक्षम प्राधिकार के पास जाएगी और किसी भी स्तर तक संघर्ष करने के लिए तैयार है।
क्या हैं एसोसिएशन की प्रमुख मांगें?
एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
निलंबन वापसी: निर्दोष पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों का निलंबन तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
पारदर्शिता: जिले में पुलिसकर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए।
पद से हटाना: एसोसिएशन ने बोकारो के एसपी को ‘अक्षम’ बताते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला? (पिंड्राजोरा थाना कांड)
विवाद की जड़ पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र से जुड़ी है, जहाँ कुछ समय पहले एक युवती रहस्यमयी तरीके से लापता हो गई थी। आरोप है कि इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने पीड़ित परिवार के साथ ही मारपीट की थी। न्याय न मिलता देख पीड़ित परिवार ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले ने तब तूल पकड़ा जब पिछले हफ्ते पुलिस ने एक नरकंकाल बरामद किया और उसे लापता युवती का अवशेष बताया। इस पूरे घटनाक्रम में लापरवाही और पुलिस की कार्यशैली पर उठते सवालों के बीच, शनिवार को एसपी हरविंदर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए पिंड्राजोरा थाना प्रभारी समेत वहां कार्यरत सभी पुलिसकर्मियों (कुल 28) को सस्पेंड कर दिया।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
एक साथ इतने बड़े पैमाने पर निलंबन की कार्रवाई से न केवल बोकारो बल्कि पूरे झारखंड पुलिस महकमे में हलचल मची हुई है। जहाँ एक ओर जनता पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठा रही थी, वहीं अब पुलिस एसोसिएशन द्वारा अपने ही विभाग के शीर्ष अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलने से मामला और अधिक पेचीदा हो गया है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस आंतरिक विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है।



